तमाम कोशिशों के बावजूद भूमिधरों को 20 वर्ष बाद भी आवंटित भूमि पर कब्जा नहीं मिल सका है। शिकायत पर अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए मौके की पैमाइश कर कब्जा दिलाने के आदेश दिए हैं। डीएम के आदेश पर गठित टीम पुलिस फोर्स को लेकर कब्जा दिलाने के लिए मौके पर पहुंची। वहां पहले से ही तैयार कई कब्जेदार महिलाएं टीम से उलझ पड़ीं और हाथापाई पर उतारू हो गईं। राजस्व और चकबंदी अधिकारी किसी तरह अपनी जान बचाकर भागे।
बता दें कि भूमि प्रबंधन समिति (एमएलसी) ने 15 मार्च 1999 को ग्राम कचनालगाजी में प्रस्ताव पारित कर फिरोजपुर के 16 लोगों को पट्टे देने का प्रस्ताव किया था। 27 मार्च 1999 को उक्त प्रस्ताव तत्कालीन परगना मजिस्ट्रेट के समक्ष अनुमोदन के लिए भेजा गया। इसमें प्रत्येक को 0.458 हेक्टेयर भूमि देने की बात कही गई थी। एसडीएम ने 16 में से नौ लोगों को पात्र माना। वहीं, भूमि पर काबिज चले आ रहे लोगों ने इस प्रक्रिया को अनियमित करार देते हुए एडीएम (नजूल) की अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया।
31 जुलाई 2017 को एडीएम (नजूल) ने पट्टाधारकों की कब्जे की स्थिति और भूमि के अंतरण के संबंध में आदेश पारित किए थे। तब से पट्टाधारक भूमि के सीमांकन की मांग कर रहे थे। इस संबंध में आवंटियों ने उत्तराखंड राज्य अनुसूचित आयोग के अध्यक्ष एवं सचिव को प्रार्थना पत्र देकर पट्टा धारकों को भूमि पर कब्जा दिलाए जाने की मांग की। आयोग ने इस संबंध में ऊधमसिंह नगर के डीएम को कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। शुक्रवार को कानूनगो राजीव वर्मा के नेतृत्व में राजस्व, चकबंदी और सर्वे टीम भूमि की पैमाइश के लिए मौके पर पहुंची।
टीम के पहुंचने की भनक पर एकत्र हुईं कई महिलाएं हाथापाई पर उतारू हो गईं। महिलाएं शिकायतकर्ता को भी मारने के लिए दौड़ीं लेकिन टीम के सदस्यों ने शिकायतकर्ता को सरकारी गाड़ी से सुरक्षित उसके घर तक पहुंचाया। कानूनगो राजीव वर्मा ने बताया कि 5 जुलाई 2018 को मौके पर पहुंची टीम ने खाता नंबर 217 व 214 में टोलबंदी की थी लेकिन हदबंदी के बगैर मौके पर कब्जा दिलाने में दिक्कतें है। वहां हल्का लेखपाल संजय कुमार, चकबंदी लेखपाल दिनेश सत्यवली, प्रतापपुर चौकी प्रभारी विजय सिंह आदि थे।