रुद्रपुर। जिले के 150 आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत संवारने के लिए महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग ने डीएम और सीडीओ की अनुमति लिए बिना न सिर्फ टेंडर करा दिए बल्कि चयनित फर्मों से केंद्रों में कार्य भी शुरू करा दिया। मामला संज्ञान में आने के बाद डीएम ने डीपीओ और डीडीओ की जगह एडीएम नजूल और ग्राम्य विकास विभाग के परियोजना निदेशक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। नए नोडल अधिकारियों को उक्त खाते से भुगतान का अधिकार दिया गया है।
दिल्ली की रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेट फाउंडेशन ने पिछले साल जिले के 150 आंगनबाड़ी केंद्रों के सौंदर्यीकरण के लिए ढाई करोड़ रुपये सीएसआर फंड से देने पर हामी भरी थी। इसके बाद पहली किस्त के रूप में 90 लाख रुपये जारी कर दिए थे। इसके तहत केंद्रों को प्री प्राइमरी के रूप में विकसित किया जाना था।
केंद्रों की दीवारों पर अक्षर ज्ञान, पेड़, जानवरों की पेंटिंग के साथ ही हर कक्ष में ईको बोर्ड लगने थे। साथ ही वॉल पेंटिंग, फर्नीचर, खिलौने, सहित अन्य सामान की खरीद होनी थी। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग ने केंद्रों में कार्य भी शुरू करा दिए थे लेकिन कुछ समय पहले जिला प्रशासन के संज्ञान में आया कि सीएसआर फंड से होने वाले कार्यों के टेंडर में सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्य कराए भी गए हैं लेकिन जिला प्रशासन को जानकारी तक नहीं है।
आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए सीएसआर से बजट मिला था लेकिन टेंडर की अनुमति डीएम और मुझसे नहीं ली गई थी। केंद्रों में कोई कार्य कराया भी गया है तो यह मेरे संज्ञान में नहीं है। अभी किसी कार्य के एवज में कोई भुगतान नहीं किया गया है। समय पर कार्य नहीं होने से नोडल अधिकारी बदले गए हैं। एडीएम जगदीश चंद्र कांडपाल और पीडी हिमांशु जोशी नए नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। इन केंद्रों में कार्यों के दोबारा टेंडर होंगे। - हिमांशु खुराना, सीडीओ।
150 आंगनबाड़ी केंद्रों में पेंटिंग का कार्य चल रहा है। पिछले साल ही टेंडर कराए गए थे। केंद्रों में कार्य प्रगति पर है। भवनों की मरम्मत भी की जा रही है। बच्चों के लिए फर्नीचर, कलर पेपर और अन्य सामान खरीदा जाना है। केंद्रों में उपभोग प्रमाणपत्र भेजने के बाद दूसरी किस्त आएगी। - उदय प्रताप सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी।
हिमांशु खुराना, सीडीओ।- फोटो : RUDRAPUR