इलाज के अभाव में निर्धन परिवार के एक किशोर की मौत हो गई। उसका पिता मृत किशोर को अपनी गोद में लेकर फफकता रहा। निजी अस्पताल के डाक्टर के किशोर के मृत होने की पुष्टि करने पर मजदूर बाप अपने बेटे को लेकर घर चला गया।
ग्राम हरिपुर फुलैर थाना माधो टांडा जिला पीलीभीत निवासी इतवारी दो सालों से सिडकुल की फैक्ट्री में मजदूरी करता है। वह अपनी पत्नी सुमनवती व चार बच्चों के साथ सिडकुल में ही किराए के कमरे पर रह रहा है। इतवारी ने बताया कि उसके सबसे बड़े बेटे सूरज (11) को बीती 13 अप्रैल को बुखार होने की शिकायत हुई।
जिस पर उसने सिडकुल में ही एक क्लीनिक के डाक्टर से बेटे सूरज का इलाज कराया। चार दिन तक बुखार के कम न होने पर 17 अप्रैल को वह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बेटे का इलाज कराने आया। यहां से उसे डा. सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर कर दिया। 28 अप्रैल को एसटीएच अस्पताल से डाक्टरों ने उसके बेटे को दिल्ली के लिए रेफर कर दिया।
धन के अभाव में वह बेटे को घर ले गया। मंगलवार को सूरज की हालत बिगड़ गई। इसपर वह उसे इलाज के लिए सीएचसी ले गया। इतवारी ने आरोप लगाया कि सीएचसी के डाक्टर ने उसके बेटे की पेशाब न उतरने पर नली डालने को कहा। जिस पर वह नली लेने मेडिकल गया। वह लौटकर आया तो अस्पताल कर्मियों ने नली न डालने की बात कही और दूसरे अस्पताल ले जाने को कहा।
जब वह अपने बेटे को निजी अस्पताल लेकर गया तो वहां डाक्टरों ने उसके बेटे को मृत घोषित कर दिया। आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल में दो घंटे तक उसका बेटा इलाज के लिए तड़पता रहा। लेकिन डाक्टरों के अभाव में उसकी कोई सुध नहीं ली गई। सूरज की मौत से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।
किशोर के हार्ट में था छेद
सूरज के हार्ट में छेद था। जिसका एसटीएच से इलाज चल रहा था। पेशाब रुकने पर उसे यहां लाया गया था। हालत गंभीर थी। नली डालने के लिए सर्जन को दिखाने की सलाह देकर उसे रेफर किया गया था।
डा. हर्ष सिंह ऐरी, चिकित्साधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सितारगंज