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तकनीक के प्रयोग से प्रभावशाली हो सकता है शिक्षण कार्य

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रुद्रपुर स्थित डायट सभागार में राष्ट्रीय सेमीनार में संबोधित करती वक्ता। - फोटो : RUDRAPUR
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रुद्रपुर। शिक्षण में आईसीटी का अनुप्रयोग और भविष्य में संभावनाएं विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमीनार के दूसरे दिन वक्ताओं ने वर्तमान में शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षण कार्य तकनीक के प्रयोग से प्रभावशाली हो सकता है।
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बृहस्पतिवार को डायट ऊधम सिंह नगर के सभागार में प्राचार्य डॉ. धर्म सिंह रावत ने दूसरे दिन के सत्र का शुभारंभ किया। मुख्य वक्ता और आईआईएम काशीपुर की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मृदुल माहेश्वरी ने कहा शिक्षक विभिन्न एप्लिकेशन का प्रयोग कर शिक्षण को रुचिकर बना सकते हैं। सीटीई हल्द्वानी की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शुभा कांडपाल ने प्राचीन काल से शिक्षण पद्धति को जोड़ते हुए वर्तमान में आईसीटी के प्रयोग पर चर्चा की। उप शिक्षा अधिकारी डॉ. गुंजन अमरोही, सुषमा गौरव और प्रेमा बिष्ट ने अपने ब्लॉक में हुए आईसीटी के कार्यों की जानकारी साझा की। वहां पर केरल से आए संतोष कुमार ने भी अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में चंपावत, अल्मोड़ा, उत्तरकाशी, टिहरी, बागेश्वर, ऊधम सिंह नगर, डायट भीमताल और डायट रुड़की के आचार्यों ने प्रतिभाग किया। वहां पर प्राचार्य धर्म सिंह रावत, डॉ. अजंता बिष्ट, चेतना मिश्रा, सीमा त्रिवेदी, एमएस रावत, डॉ. आशुतोष वर्मा, सेमीनार समन्वयक बीपी जोशी, एसके सिंह, रुचि पाठक आदि थे।
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