अगर आपके स्कूल के पते पर डाक से एक चिट्ठी आए और उसमें लिखा हो कि 1.47 करोड़ रुपये का बकाया जमा करें। जरा सोचिए, कैसा लगेगा? कुछ ऐसा ही हुआ रुद्रपुर के व्यापारी प्रदीप कुमार के साथ। उत्तराखंड भवन एवं संनिर्माण बोर्ड ने लेबर सेस की वसूली के लिए नोटिस तो बिल्डर कंपनी के नाम पर निकाला लेकिन पता गलत डाल दिया। नतीजा ये हुआ कि करोड़ों की वसूली का नोटिस व्यापारी के स्कूल पर जा पहुंचा। नोटिस देखते ही व्यापारी के पसीने छूट गए और वे तुरंत व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा समेत अन्य व्यापारियों के साथ चर्चा की। सहायक श्रमायुक्त ने नोटिस के साथ 29 अगस्त को उनके समक्ष पेश होने के निर्देश दिए थे।
शुक्रवार को प्रदीप सहायक श्रमायुक्त अरविंद सैनी के पास पहुंचे। उन्होंने गलत पते पर भेजे नोटिस पर अपनी बात रखी। एएलसी ने गलती मानी और व्यापारी से शपथ पत्र मांगा था। संजय ने विभागीय गलती पर व्यापारी से शपथ पत्र मांगने का विरोध किया। इसके बाद एएलसी ने नोटिस को सही पते पर भेजने की बात कही।
कैसे हुई ये गड़बड़ी?
बोर्ड नियम के मुताबिक किसी भी निर्माण की कुल लागत का एक फीसदी सेस वसूला जाता है। रुद्रपुर में 85,050 वर्ग मीटर के एवज में एक बिल्डर कंपनी पर 1.47 करोड़ का बकाया निकाला था। नोटिस भी कंपनी के नाम से जारी हुआ, लेकिन उसके साथ कंपनी की बसाई कॉलोनी के स्कूल का पता लिख दिया गया। श्रम विभाग ने उसी पते पर नोटिस भेज दिया और मामला व्यापारी के गले पड़ गया।