मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं कर पाने के कारण मुंबई हाईकोर्ट के फैसले के बाद टाटा मोटर्स ने रोजीताशा कंपनी से बरसों पुराना नाता तोड़ दिया है। टाटा से नाता टूटते ही रोजीताशा बंदी की कगार पर पहुंच गई है, जिस कारण से पहले ही समस्या से जूझ रहे श्रमिकों की समस्याएं अब बेरोजगारी को लेकर और बढ़ गई है।
टाटा कंपनी से पहुंचे टाटा के अधिकारियों ने पुलिस फोर्स की मौजूदगी में रोजीताशा से अपना सामान समेट लिया। इस दौरान रोजीताशा कर्मचारियों ने जमकर हंगामा भी काटा। उनका कहना था कि कंपनी बंद होने से वह भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे।
सिडकुल के सेक्टर 11 में स्थित रोजीताशा फैक्ट्री टाटा मोटर्स लिमिटेड की वेंडर कंपनी है, जहां पर वाहनों के तमाम पार्ट बनाए जाते हैं। लेकिन, पिछले कुछ समय से कंपनी मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं कर पा रही थी, जिस कारण से टाटा मोटर्स की अपनी ही वेंडर कंपनी से ठनक गई। इसके बाद टाटा मोटर्स ने मुंबई हाईकोर्ट में वाद दायर कर दिया। मुंबई हाईकोर्ट से आदेश मिलने के बाद कंपनी के अधिकारी रोजीताशा फैक्ट्री पहुंच गए।
कंपनी अधिकारियों के वहां पहुंचते ही कंपनी के कर्मचारियों में रोष व्याप्त हो गया। उन्होंने वहां पर जमकर हंगामा काटना शुरू कर दिया। इस बीच पुलिस बल की मौजूदगी के बीच कंपनी अधिकारियों ने अपना पूरा सामान समेट लिया। टाटा द्वारा अपना सामान समेट लेने के बाद कंपनी बंदी की कगार पर पहुंच गई है। रोजीताशा कंपनी में वर्तमान में लगभग चार सौ से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हैं। बताया जाता है कंपनी में स्थायी कर्मचारियों की संख्या काफी कम हैं। सारा काम ठेके पर रखे गए श्रमिकों के भरोसे ही चला करता था।
श्रमिक आंदोलन ने डुबोई लुटिया
रुद्रपुर। श्रमिक आंदोलन के लिए रोजीताशा कंपनी बदनाम है। यहां पर आए दिन श्रमिक आंदोलन का झंडा बुलंद करते आए हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि कंपनी में अधिकतर कामगार ठेका प्रथा पर कार्यरत हैं। अपनी मांगों को मनवाने के लिए श्रमिक आए दिन काम ठप करते रहे हैं, जिस कारण से कंपनी टाटा को मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं कर पाई। जिसका नतीजा आज सबके सामने है।