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सहकारी समितियों में पुराने बड़े नोट नहीं लेने से किसान परेशान

Fri, 18 Nov 2016 11:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, काशीपुर
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सहकारी समितियों द्वारा किसानों से पुराने बड़े नोट नहीं लेने से किसानों के सामने गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। इससे गेहूं और मटर की बुआई प्रभावित हो रही है।


 नोट बंदी की गाज किसानों पर गिरी है। सरकारी खरीद नाम मात्र होने के कारण किसानों ने मंडी में धान बेचा है। मंडी के आढ़ती और राइस मिलर किसानों को भुगतान के रुप में एक हजार व पांच सौ के नोट देकर ब्लैक मनी को व्हाइट कर रहे है। उधर बैंकों में रुपए जमा तो हो रहे हैं, लेकिन दिन भर लाइन लगाने के बाद शाम तक नंबर आ रहा है। वह भी खातों में केवल ढाई लाख रुपये तो जमा हो रहे हैं लेकिन कुल पच्चीस हजार रुपये निकल रहे हैं। खासकर बड़े किसानों के सामने खाद, बीज, खेतों की जुताई की गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। सहकारी समितियां किसानों से बंदी वाले नोट नहीं ले रही हैं।
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इससे किसान सहकारी समितियों का बकाया भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। बिना बकाया भुगतान किए किसान को खाद, बीज व नकदी का ऋण नहीं मिल रहा है। इससे किसानों के सामने गेहूं और मटर की फसल बुआई का संकट उत्पन्न हो गया है। अपर जिला सहकारी अधिकारी केपी खरे ने कहा कि सरकार ने सहकारी समितियों में प्रतिबंधित नोटों के जमा करने पर रोक लगाई है। इससे सहकारी समितियों का किसानों पर बकाए रुपए जमा नहीं हो रहे हैं।


- भारतीय किसान यूनियन के नेता सतनाम सिंह चीमा ने कहा कि आढ़तियों ने किसानों को एक बजार व पांच सौ के पुराने नोटों में भुगतान किया है। लेकिन सहकारी समितियां इन नोटों को नही ले रही है। कई किसानों के दूसरे बैकों में खाते नहीं होने से बदल नहीं रहा है। जिससे किसान का गेहूं, मटर व गन्ना बुआई का काम ठप पड़ा है। उन्होंने कहा कि यह किसानों के साथ ना इंसाफी है।


-किसान यूनियन के महामंत्री बलजिंदर सिंह संधू ने कहा कि सहकारी समितियों द्वारा किसानों से पुराने एक हजार व पांच सौ के रुपयों में कर्जा जमा नही कराने से किसानों की गेहूं की बुआई का काम ठप पड़ गया है। किसान ने सहकारी समितियों में जब किसान का खाता साफ होगा तभी खाद बीज मिलेगा। इसके चलते किसानों के खेत खाली पड़े है।
-दक्षिणी किसान सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष कश्मीर सिहं ने कहा कि सहकारी समितियों को किसानों से बंद हो चुके नोटों से भुगतान लेने की अनुमति नही मिलने से सहकारी समितियों की बकाया वसूली नही हो रही है। जिससे समितियों से बैकों के कर्ज का भुगतान नही हो रहा है। किसान भी खाद, बीज के लिए परेशान है।


-भारतीय किसान यूनियन के उपाध्यक्ष कल्याण सिंह ने कहा कि सरकार की किसान विरोधी नीतियों के चलते किसान बर्बाद हो गया है। आढ़तियों ने किसानों को बंद हो चुके नोटों में भुगतान किया। सहकारी समितियां इन नोटों को नही ले रही है। बिना ऋण भुगतान के किसान को सहकारी समितियां खाद बीज नहीं दे रही है। किसान के खेत बंजर पड़े है। पहले से बर्बाद किसान और बर्बाद हो गए।
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-किसान विकास क्लब के अध्यक्ष अरुण शर्मा ने सरकार से सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को पुराने नोटों से भुगतान लेने की मांग कर कहा कि सहकारी समिति को बकाया भुगतान नहीं होने से किसानों को खाद बीज नहीं मिल रहा है। ऐसे में किसान फसल बुआई कैसे करेगा। अगली रवि की फसल भी मारी जाएगी।

 
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