रुद्रपुर के जिला पंचायत बोर्ड बैठक में चर्चा करतीं रेनू गंगवार व सदस्य। संवाद
रुद्रपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष रेनू गंगवार और अपर मुख्य अधिकारी तेज सिंह के बीच तनातनी करीब एक महीने से चल रही थी। मुद्दा निर्माण कार्यों के टेंडर और अन्य कार्यों को लेकर था। पटकथा 20 दिसंबर को ही लिखी गई जब जिला पंचायत अध्यक्ष ने कईं गंभीर आरोप लगाकर अपर मुख्य अधिकारी और इंजीनियरों का वेतन अगले आदेशों तक रोक दिया था। सोमवार को बोर्ड बैठक में इसकी गूंज सूनी भी गई और देखी भी गई।
अध्यक्ष की ओर से बुलाई गई बोर्ड बैठक का जो एजेंडा अपर मुख्य अधिकारी को भेजा गया था उसके पहले बिंदु में ही अपर मुख्य अधिकारी और वित्तीय परामर्शदाता के खिलाफ निंदा प्रस्ताव और अन्य जिले में तबादले का प्रस्ताव का रखा गया था। इसके साथ ही चार बिंदुओं पर अपर मुख्य अधिकारी से सदन में स्पष्टीकरण देने और एक बिंदु पर मनमानी की वजह सदन में बताने को कहा गया था। जाहिर सी बात है कि ऐसी स्थिति में अधिकारी अपने ही खिलाफ कार्यवाही के लिए कैसे सदन में पहुंचते। अपर मुख्य अधिकारी ने भी नियमों को गिनाते हुए बैठक का एजेंडा जारी नहीं करने का पत्र जारी किया। साथ ही अध्यक्ष की ओर से खुद ही एजेंडा तैयार करने और अपर मुख्य अधिकारी की असहमति का जिक्र कर गेंद शासन के पाले में डाल दी। संवाद
अपर मुख्य अधिकारी अपने कक्ष में बैठे रहे
जिपं अध्यक्ष रेनू ने न सिर्फ बोर्ड बैठक की बल्कि 24 सदस्यों को भरोसे में लेकर बैठक कर एजेंडे में रखे सभी प्रस्ताव पास करा लिए। पहली बार बोर्ड बैठक में जिला स्तर के अधिकारी शामिल नहीं हुए और अपर मुख्य अधिकारी अपने कक्ष में बैठे रहे। पूरी बैठक की कार्यवाही की वीडियोग्राफी भी कराई गई। इस पूरे मामले में जिपं कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी भी संशय में हैं कि किसके साथ खड़े रहें।
विशेष आमंत्रित सदस्यों के स्वीकृत होते हैं सर्वाधिक प्रस्ताव
जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में सदस्यों ने जिला योजना का मुद्दा भी सदस्यों ने उठाया। सदस्यों का कहना था कि जिला योजना समिति में सबसे अधिक सदस्य जिला पंचायत से चुने गए हैं लेकिन जिला योजना में सबसे अधिक प्रस्ताव विशेष आमंत्रित सदस्यों के स्वीकृत किए जाते हैं। सदन ने इस संबंध में डीएम को पत्र भेजने का प्रस्ताव पारित किया। संवाद