शहर निवासी एक व्यक्ति की दिल्ली के एक अस्पताल में संदिग्ध स्वाइन फ्लू से मौत हो गई। क्षेत्र में स्वाइन फ्लू से मृत्यु का यह पहला मामला है। नोएडा के एक अस्पताल में इलाज के दौरान रोगी को खून चढ़ाया गया था। मृतक के परिजनों को नोएडा के अस्पताल में चढ़ाए गए खून में स्वाइन फ्लू का वायरस होने का संदेह है। इस मामले को लेकर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग चौकन्ना हो गया है।
अल्ली खां मोहल्ला निवासी हाजी मोहम्मद हारुन (58 वर्ष) को पाइल्स की तकलीफ थी। यहां एक निजी अस्पताल में उपचार कराने के बाद जब लाभ नहीं हुआ तो परिजनों ने एक सप्ताह पहले उन्हें नोएडा के एक अस्पताल में भर्ती कराया। हाजी मोहम्मद हारून के छोटे भाई अब्दुल मलिक तीमारदारी के लिए अन्य रिश्तेदारों के साथ गए थे। मरीज के छोटे भाई अब्दुल ने बताया कि नोएडा के अस्पताल में हाजी हारुन को कमजोरी होने पर डाक्टरों ने बीती 7 फरवरी को खून चढ़ाया। खून चढ़ाने के कुछ समय बाद ही उनकी हालत बिगड़ने लगी। डाक्टरों ने जांच कर उन्हें स्वाइन फ्लू होना बताया और राममनोहर लोहिया अस्पताल दिल्ली के लिए रेफर कर दिया। 8 फरवरी को वह एंबुलेंस से राममनोहर लोहिया अस्पताल गए। जहां डाक्टरों ने यह कहकर एंट्री नहीं दी कि बेड खाली नहीं है। केंद्र और उत्तराखंड के नेताओं से सिफारिश कराने के बाद भी भर्ती नहीं किया गया। लेकिन डाक्टरों ने बाहर आकर उनका परीक्षण किया और उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मलिक ने बताया कि उनको संदेह है कि हाजी मोहम्मद हारुन की नोएडा के अस्पताल में ही मौत हो गई थी। उनको आईसीयू (गहन चिकित्सा कक्ष) में रखा गया था। डाक्टरों ने उनसे मृत्यु छुपाई है। नोएडा के डाक्टरों ने मरीज के साथ गए लोगों को एंटी स्वाइन फ्लू दवा पिलाई और खाने को दवाई दी ताकि उनको स्वाइन फ्लू का वाइरस अटैक न करे। शव को लेकर परिजन दिल्ली से सोमवार तड़के घर पहुंचे और 10 बजे स्थानीय कब्रिस्तान में शव को दफना दिया गया।