प्रदेश की सहकारी और सरकारी चीनी मिलें लगातार घाटे में जा रही हैं, जिसके चलते उन पर प्रदेश सरकार का 857 करोड़ 43 लाख छह हजार रुपये का कर्ज हो गया है। अब बीते वित्तीय वर्ष का किसानों का भुगतान लटका हुआ है, इसके लिए कैबिनेट ने 110 करोड़ 77 लाख 95 हजार रुपये का कर्ज और देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, शीघ्र ही बजट जारी हो जाएगा।
प्रदेश में सहकारिता की तीन और निगम की दो चीनी मिलें संचालित हैं। लगातार घाटे के चलते दो साल पहले गदरपुर चीनी मिल बंद कर दी गई थी। अन्य पांच मिलें भी आवश्यकतानुसार गन्ने की पूर्ति न होने, पुरानी मशीनों और कम उत्पादन के चलते लगातार घाटे में जा रही हैं। राजनीतिक हस्तक्षेप भी मिलों के घाटे में जाने का एक कारण माना जा रहा है। हाल में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबका साथ सबका विकास के नारे के साथ चीनी मिलों के आधुनिकीकरण की घोषणा की थी, लेकिन अब पीपीपी मोड की सुगबुगाहट से चीनी मिल कर्मियों में आक्रोश पनपने लगा है। मिलों की कई यूनियनों ने तो सरकार के फैसले के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजा दिया है।
गन्ना आयुक्त के जनसंपर्क अधिकारी कमल जोशी ने बताया कि गन्ना किसानों का मिलों पर पेराई सत्र 2016-17 का 110 करोड़ 77 लाख 95 हजार रुपये बकाया है, जिसके भुगतान के लिए प्रदेश कैबिनेट में प्रस्ताव मंजूर हो चुका है। उम्मीद है कि जल्द बजट जारी हो जाएगा।
जोशी ने बताया कि पेराई सत्र 2016-17 में सहकारी चीनी मिल सितारगंज पर 18 करोड़ सात लाख 52 हजार, सहकारी चीनी मिल बाजपुर पर 23 करोड़ 80 लाख 13 हजार, सहकारी चीनी मिल नाहेदी पर 22 करोड़ 33 लाख 97 हजार और निगम की चीनी मिल किच्छा पर 26 करोड़ 44 लाख 33 हजार, निगम की डोईवाला मिल पर 20 करोड़ 12 लाख रुपये किसानों को भुगतान करना है।
प्रदेश सरकार का चीनी मिलों पर कर्ज
सितारगंज 177 करोड़ 56 लाख 58 हजार
बाजपुर 159 करोड़ 49 लाख 87 हजार
डोईवाला 133 करोड़ 67 लाख 75 हजार
गदरपुर 138 करोड़ 20 लाख
किच्छा 125 करोड़ 57 लाख 14 हजार
नादेही 122 करोड़ 91 लाख 72 हजार
सर्वाधिक कर्जदार सितारगंज मिल
सितारगंज चीनी मिल पर सर्वाधिक 177 करोड़ 56 लाख 58 हजार रुपये बाकी है, जबकि नाहेही चीनी मिल पर सबसे कम 122 करोड़, 91 लाख 72 हजार हैं। सरकार ने वर्ष 2013-14 में चीनी मिलों को सबसे अधिक 199 करोड़ 53 लाख 29 हजार रुपये दिए। गन्ना आयुक्त के जनसंपर्क अधिकारी कमल जोशी ने बताया कि कुछ मिलों ने नाममात्र का कर्ज लौटाया है।