काशीपुर। कभी केवल कंप्यूटर के कोड में उलझे रहने वाले युवक ने अब मिट्टी और केंचुओं से भी दोस्ती कर ली है। अमेरिका में डाटा साइंस की पढ़ाई और गुरुग्राम में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी करने वाले क्षितिज सिरोही ने ऑर्गेनिक फार्मिंग की तरफ कदम बढ़ाया है।
गढ़ीनेगी ग्राम निवासी क्षितिज को बोस्टन में पढ़ाई के दौरान उन्होंने महसूस किया कि वहां के लोग स्वास्थ्य के प्रति कितने सजग हैं। अमेरिका में ऑर्गेनिक फूड रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। भारत लौटकर उन्हें महसूस हुआ कि यहां के लोग पैकेट बंद खाना और रसायनिक खादों के पैदा उपज खाकर अनजाने में बीमारियों को न्योता दे रहे हैं।
क्षितिज के पिता विनीत सिरोही किसान हैं। खेती की यही विरासत अब आधुनिक सोच के साथ मिलकर वर्मी कंपोस्ट के रूप में नया अध्याय लिख रही है। क्षितिज ने अपने गांव में केंचुओं की मदद से जैविक खाद बनाना शुरू किया है। आज वे हर बार करीब ढाई क्विंटल वर्मी कंपोस्ट तैयार करते हैं। लक्ष्य है शहरों की छतों के गमलों और गांवों के खेतों दोनों में मिट्टी को फिर से जिंदा करना। फिलहाल क्षितिज अपनी सॉफ्टवेयर की नौकरी के साथ खेतों में भी सक्रिय हैं लेकिन जल्द वे पूरी तरह ऑर्गेनिक खेती को समर्पित करने की योजना में हैं।
क्या है वर्मी कंपोस्ट
वर्मी कंपोस्ट एक जैविक खाद है जो केंचुओं की मदद से पौधों और रसोई के कचरे को अपघटित करके बनाई जाती है। यह मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाती है और फसलों के लिए प्राकृतिक पोषक तत्व उपलब्ध कराती है। बिना बदबू वाली यह खाद पर्यावरण के लिए भी पूरी तरह अनुकूल मानी जाती है।
12 रुपये किलो में बेच रहे वर्मीकंपोस्ट
वर्मीकंपोस्ट को एक, पांच और 25 किलो के पैक में बेचा जा रहा है। कीमत 10 से 12 रुपये प्रति किलो होती है। इसकी ऑनलाइन बिक्री के लिए वेबसाइट भी तैयार की गई है ताकि इसे देशभर के ग्राहकों तक पहुंचाया जा सके।
कोट
यह सिर्फ खेती नहीं, एक सोच है। मैं चाहता हूं कि आने वाली पीढ़ियां रासायनिक खाद से नहीं, प्राकृतिक ढंग से तैयार उपज खाएं। वर्मी कंपोस्ट धरती और इंसान दोनों की सेहत के लिए फायदेमंद है। -क्षितिज सिरोही, वर्मी कंपोस्ट उत्पादक