रुद्रपुर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय भदईपुरा की कक्षा में फैला पानी दिखाती शिक्षिका
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बारिश ने जहां एक ओर पूरे तराई क्षेत्र में जनजीवन अस्तव्यस्त कर दिया है, वहीं दूसरी ओर स्कूलों में पढ़ रहे नौनिहाल भी अपनी जान जोखिम में डालकर तालीम हासिल करने को मजबूर हैं। बारिश का पानी राजकीय प्राथमिक विद्यालय भदईपुरा के जर्जर भवन की छत से दो कक्षा कक्षों में घुस गया। इतना ही नहीं स्कूल की छत एक कुछ हिस्सा भी टूटकर फर्श पर आ गिरा। एहतियातन बच्चों को दूसरे कक्षों में बैठाकर पढ़ाया गया।
राजकीय प्राथमिक विद्यालय भदईपुरा का वर्ष 1973 में निर्मित भवन जर्जर स्थिति में है। बरसात में स्कूल में पढ़ रहे 542 बच्चों के लिए खतरे का सबब बना हुआ है। शनिवार को जर्जर भवन की छत से बारिश का पानी दो कक्षा कक्षों में भर गया। इसके चलते एहतियातन कक्षा एक से पांचवीं तक के बच्चों को शिक्षकों ने दो कक्षों और बरामदे में बिठाकर पढ़ाया।
बारिश का पानी कक्षा कक्षों के अलावा स्कूल में बने ऑफिस में भी जमा हो गया है। जिस कारण कार्यालय संबंधी कार्य करने में दिक्कतें हो रही हैं। प्रभारी प्रधानाध्यापक कुसुम पाल ने बताया कि बरसात में विद्यालय में बैठने को पर्याप्त जगह नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को जर्जर भवन की लिखित सूचना पहले दी जा चुकी है।
अधर में लटका है दो कक्षों का निर्माण
रुद्रपुर। राजकीय प्राथमिक विद्यालय भदईपुरा में वर्ष 2011-12 से दो अतिरिक्त कक्षा कक्षों का निर्माण किया जा रहा है। सरकारी तंत्र की हीलाहवाली से छह वर्ष बाद भी कक्षों का काम पूरा नहीं हो सका। यह हालात उस जिले के स्कूल के हैं, जहां के एक विधायक प्रदेश के शिक्षामंत्री है। भदईपुरा का प्राईमरी स्कूल रुद्रपुर शहर के केंद्र में स्थित है, शिक्षा महकमे के आला अधिकारी यहां से महज कुछ ही दूरी पर बैठते हैं। बावजूद इसके इन कक्षा कक्षों के खिड़की दरवाजे और फर्श का काम पूरा नहीं हो सका।