सरकार शिक्षा व्यवस्था दूरस्थ करने के लिए प्रयास कर रही है। वहीं शिक्षा विभाग के शिक्षक और अधिकारी ही सरकार की योजनाओं में बाधक बने हुए हैं। ऐसे में अधिकारियों और शिक्षकों की लापरवाही का खामियाजा स्कूल के छात्र भुगत रहे हैं। जिले में कई विद्यालयों में जहां छात्र संख्या कम होने के बावजूद आवश्यकता से अधिक शिक्षक है। तो वहीं कई विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है।
राजकीय प्राथमिक विद्यालय रम्पुरा में 572 विद्यार्थी पढ़ते हैं। यहां स्टाफ की भारी कमी है। यहां 572 छात्रों के लिए केवल दो अध्यापिकाएं की नियुक्ति की गई हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। प्रा.वि. रुद्रपुर में 200 बच्चों में 6 अध्यापक तैनात हैं। वहीं प्रा.वि. वाल्मीकि नगर में 242 विद्यार्थियों में पांच अध्यापिकाएं तैनात हैं।
यहां पढ़ाई का स्तर इसी बात से लगाया जा सकता है कि पेपर के दौरान जहां बच्चें स्कूल के फील्ड और दीवारों में परीक्षा कॉपी लेकर घूमते दिखाई दिए। वहीं अध्यापिकाएं कमरे में बैठी थी।
स्कूल में खड़ी होती है पार्षद की गाड़ी
रुद्रपुर। राजकीय प्राइमरी विद्यालय रम्पुरा के स्कूल के फील्ड में पार्षद की गाड़ी खड़ी होती है। बृहस्पतिवार को स्कूल में परीक्षा चल रही थी और पार्षद की गाड़ी स्कूल के परिसर में खड़ी थी। जब यह बात स्कूल की प्रधानाचार्य शशिकला से पूछी तो उन्होंने बताया कि वह कितने बार मना कर चुकी है, लेकिन पार्षद नहीं मानते हैं।
यहां तक जब वह गेट में ताला लगा कर घर को चली जाती हैं, तो पार्षद ताला तोड़ कर गाड़ी स्कूल के फील्ड में खड़ा कर देता है। इससे स्कूल के बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
शौचालयों की हालत खराब
रुद्रपुर। स्वच्छ भारत अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में शौचालय बनाए जा रहे हैं। रुद्रपुर में शिक्षा विभाग के कागजों में सभी सरकारी स्कूलों में शौचालय पूर्ण रूप से बन चुके हैं। लेकिन हालत इसके विपरीत है। रम्पुरा स्कूल में शौचालय टूटे हुए थे।
एक कक्षा में भरे हुए थे सैकड़ों बच्चे
रुद्रपुर। रम्पुरा और वाल्मीकि नगर के प्राइमरी पाठशाला में बच्चों के बैठने के लिए कमरे नहीं हैं। इतनी गर्मी में यहां ठूस ठूस कर बच्चे बैठाए गए थे।
बच्चे परीक्षा कॉपी लेकर फील्ड में घूम रहे
रुद्रपुर। इसे अध्यापक की लापरवाही कहें या कुछ और। प्राइमरी पाठशाला वाल्मीकि नगर में परीक्षाएं चल रही थी। परीक्षा के दौरान बच्चे स्कूल के फील्ड में घूम रहे थे। वहीं अध्यापिकाएं गप्पें मारने में मशगूल थी।