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दायित्वधारी और नेताओं ने नहीं लौटाए गनर

Sun, 21 Feb 2016 12:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/रुद्रपुर।
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 दायित्वधारियों और पार्टी नेताओं को गनर वापस करने की कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की नसीहत का असर होता नहीं दिख रहा है। जिले में अभी तक एक भी नेता या दायित्वधारी ने अपना गनर वापस नहीं लौटाया है। जिले में विधायकों, मेयर, जिला पंचायत अध्यक्ष को छोड़ दें तो 24 दायित्वधारी और नेताओं के पास गनर की सुविधा है। दिलचस्प बात है कि नेताओं से गनर वापस करने के लिए किशोर उपाध्याय मुख्यमंत्री हरीश रावत को भी पत्र लिख चुके हैं। सीएम ने भी उपाध्याय की सलाह का समर्थन किया था।
 शासनादेश की जद में आने वाले दायित्वधारियों के अलावा ऐसे नेताओं को गनर दिए जाते थे, जिनकी जान को खतरा होता था। लेकिन धीरे-धीरे नेताओं में गनर रखना स्टेटस सिंबल माना जाने लगा। प्रदेश में जिस पार्टी की सरकार होती है, उसके नेता अपनी पहुंच के चलते गनर आवंटित करा लेते हैं। कई शासन स्तर तो कई स्थानीय स्तर से गनर ले लेते हैं। जिले की स्थिति देखें तो आठ दायित्वधारियों, एक नगर पंचायत अध्यक्ष और हाईकोर्ट के आदेश पर एक व्यक्ति को गनर मिला हुआ है। इसके अलावा 15 कांग्रेसी नेताओं को गनर की सुविधा दी गई है। जिनमें से कुछ को शासन स्तर और कुछ को स्थानीय स्तर से सुविधा दी गई है। बीते 31 जनवरी को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर नेताओं को दिए गनर वापस लेने का अनुरोध किया था। उपाध्याय ने नेताओं और दायित्वधारियों से भी गनर वापस करने को कहा था। लेकिन उनकी नसीहत का असर न तो दायित्वधारियों पर हुआ है और न ही नेताओं पर। अभी तक एक ने भी गनर वापस करने की पहल नहीं की है। एसएसपी केवल खुराना कहते हैं कि अभी तक किसी ने भी गनर वापस नहीं किया है। कुछ नेताओं ने गनर को लेकर सीएम का आदेश तो करवा दिया, लेकिन गृह विभाग से शासनादेश नहीं हो सका है। ऐसे नेताओं से 25 फरवरी तक शासनादेश कराने को कहा गया है। अगर वे शासनादेश नहीं करवाते हैं तो गनर वापस ले लिया जाएगा। कुछ नेताओं की जीवनभय आख्या भी भेजी जा चुकी है।
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समय पूरा, मगर सात ने नहीं लौटाए गनर
रुद्रपुर। जिले में सात नेता या जनप्रतिनिधि ऐसे हैं, जिनका गनर संबंधी शासनादेश का समय पूरा हो चुका है। लेकिन उन्होंने अभी तक गनर वापस नहीं लौटाया है। इनमें से चार कांग्रेस नेता और तीन जनप्रतिनिधि शामिल हैं। एसएसपी केवल खुराना ने बताया कि ऐसे नेताओं को नया शासनादेश करवाने को कहा गया है।
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