सगे चाचा की हत्या का है आरोप, नेपाल में होने की उड़ाई थी अफवाह, हरियाणा में छिपकर रह रहा था एक लाख रुपये का इनामी
संवाद न्यूज एजेंसी
पंतनगर। एसटीएफ की देहरादून यूनिट ने 14 साल से फरार एक लाख रुपये के इनामी हत्यारोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर सगे चाचा की हत्या का आरोप है। हत्यारोपी रिश्तेदारी और परिचितों में नेपाल में रहने की अफवाह फैलाकर हरियाणा के बल्लभगढ़ में नाम बदलकर रह रहा था।
एसटीएफ के अनुसार सुभाषनगर दवाई फॉर्म निवासी दुर्गादत्त पंत का उनके भाई केशवदत्त पंत के साथ पैतृक गांव पन्यूड़ा लोहाघाट जिला चंपावत में जायदाद के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था। करीब 14 वर्ष पूर्व केशवदत्त पंत का पुत्र प्रकाश पंत 10 दिसंबर 2009 को दिल्ली से अपने चाचा के पास सुभाषनगर जायदाद के संबंध में बात करने आया था। इसको लेकर उसका चाचा से विवाद हुआ था और प्रकाश ने गुस्से में तमंचे से दुर्गादत्त की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
मामले में प्रकाश के खिलाफ लालकुआं थाने में हत्या की संगीन धाराओं में केस दर्ज हुआ था। जिसकी गिरफ्तारी के लिए नैनीताल पुलिस ने काफी प्रयास किए परंतु सफलता नहीं हासिल हुई। पुलिस ने फरार प्रकाश गिरफ्तारी पर इनाम भी घोषित किया। जिसकी रकम बढ़ते-बढ़ते एक लाख रुपये तक पहुंच गई लेकिन उसका कहीं कोई सुराग नहीं लगा। इधर, शनिवार को देहरादून एसटीएफ ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
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विभिन्न शहरों में नाम बदलकर रहा और शादी भी की
पंतनगर। प्रकाश ने पुलिस से बचने के लिए दिल्ली, हरियाणा, बेंगलुरु, तमिलनाडु व गुजरात आदि जगहों में शरण ली और अपना नाम ओमप्रकाश बताया। वेल्डिंग के काम में दक्ष होने के कारण उसे आसानी से काम मिल जाता था। वह अपने छिपने का स्थान बदलकर वेल्डिंग की दुकानों या फैक्टरी में काम करता रहा। आरोपी प्रकाश ने एसटीएफ को बताया कि वह पहले फरीदाबाद में वेल्डिंग फैब्रिकेशन फिटर काम का काम कर चुका था। वर्ष 2016 में उसने उन्नाव (यूपी) की रहने वाली पूजा से शादी कर ली थी, जिससे उसे सात, चार और दो वर्ष के तीन बेटे हैं। उसने बल्लभगढ़ (हरियाणा) में वेल्डिंग मशीन के सामान की दुकान खोल ली और पिछले सात साल से वहीं रह रहा था। उसने बल्लभगढ़ के जीवन नगर पार्ट-2 गोची में अपना एक घर भी बना लिया है। उसने अपनी रिश्तेदारी में सभी जगह यह अफवाह फैला दी थी कि वह अब नेपाल में रह रहा है। संवाद
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टूटा दुखों का पहाड़, बेटे ने मेहनत मजदूरी से परिवार को संभाला
पंतनगर। दुर्गादत्त पंत की मौत के बाद उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ ही टूट पड़ा। छोटे बेटे रमेश पंत ने बताया कि पिता के मौत से छह माह माह पूर्व ही उसकी शादी हुई थी। उस समय उनकी उनकी उम्र मात्र 17 वर्ष थी और उसने 12वीं की परीक्षा दी थी। पिता बटाई पर खेतीबाड़ी का काम करते थे, उनकी मौत के बाद वह काम बंद हो गया। इससे परिवार की गुजर बसर भी मुश्किल हो गई। उसने खेतों में मजदूरी और रिक्शा आदि चलाकर परिवार का भरण पोषण किया। जरूरत पड़ने पर उसने सिडकुल में दो-दो शिफ्ट में मजदूरी का भी काम किया। अब वह शांतिपुरी-बिंदुखत्ता क्षेत्र में समाचार पत्र बांटकर जीवनयापन कर रहे हैं। संवाद