राज्य में अनुसूचित जनजातियों के अभ्यर्थियों को राजकीय सेवाओं में प्रदान किए जा रहे आरक्षण की समीक्षा एवं उनके प्रतिनिधित्व को बढ़ाए जाने के लिए गठित समिति की बैठक में पूर्व मुख्य सचिव एवं कमेटी के अध्यक्ष नृप सिंह नपलच्याल ने कहा कि जनजाति समाज आर्थिक, शैक्षिक, सामाजिक पिछड़ेपन की वजह से सरकारी नौकरियों में भी पिछड़ रहा है।
इस दौरान लोगों ने किसानों को फसल का उचित मूल्य न मिलने, जमीनों के रकबे कम होना भी आर्थिक रूप से कमजोर होना कारण बताया। इस दौरान जनजाति की कृषि भूमि को अकृषक किए जाने के मामले भी उठे।
ब्लाक सभागार में आयोजित बैठक में वक्ताओं ने सरकारी नौकरियों में जनजातियों के घटते प्रतिनिधित्व पर चिंता व्यक्त की।
कमेटी के अध्यक्ष नपलच्याल ने कहा कि अब तक धार्चूला, कालसी, देहरादून में हुई जनजातियों के आरक्षण को लेकर हुई बैठकों में हर जगह राजकीय सेवाओं में आरक्षण बढ़ाने की मांग उठी है। राणा थारु परिषद के पूर्व अध्यक्ष रमेश चंद्र सिंह राणा ने कहा कि जनजातियों के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाए जाने की अवश्यकता है। एलएस राणा ने कहा कि प्रदेश में 1.08 राज्यआंदोलनकारी हैं। लेकिन उनके लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है। उसी के आधार पर जनजातियों का आरक्षण बढ़ाया जाए। मदन सिंह राणा ने हिमांचल, झारखंड, छत्तिसगढ़ के हिसाब से आरक्षण बढ़ाने की मांग की। रमेश राणा ने निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू करने, आउट सोर्सिंग व संविदा पर हुई भर्ती में आरक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने, रोस्टर को 24वें स्थान से नीचे लाने की मांग की।
पूनम राणा ने पदोन्नति में आरक्षण लागू करने की मांग की। विधायक डा. प्रेम सिंह राणा ने आरक्षण के आधार पर विधानसभा की एक सीट घटने का मामला उठाया। बैठक में जनजाति की जमीनों को अकृषक घोषित करने के मामले उठने पर उन्होंने कहा कि यह हो नहीं सकती लेकिन यहां किस आधार पर हो रही है। इसके लिए सरकारी मिशनरी को नजर रखनी चाहिए।
इस अवसर पर अपर सचिव समाज कल्याण रमेश चंद्र लोहनी, निदेशक जनजाति कल्याण विभाग योगेंद्र रावत, जिला समाज कल्याण अधिकारी वर्षा आर्य, एसडीएम ऋचा सिंह, तहसीलदार राधेश्याम राणा, पूर्व विधायक गोपाल सिंह राणा, ब्लाक प्रमुख दान सिंह राणा, शीशराम राणा, गोपाल सिंह राणा चांदा, लीलावती राणा, बचन सिंह राणा, सुरेश राणा, बीना राणा, राकेश राणा, बिंदू राणा आदि थे।