उत्तराखंड का भले ही ऊर्जा प्रदेश कहा जाता है, मगर बिजली का जबर्दस्त संकट है। बिजली संकट को लेकर राहत भरी खबर है। गैस आधारित बिजली प्रोजेक्ट श्रावंथी इनर्जी प्राइवेट लिमिटेड को गैस मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
गैस की समस्या हल होने के बाद प्लांट को एक्टिव मोड पर लाने का काम भी शुरू कर दिया गया है। करीब चार साल बाद गैस की समस्या हल होने के बाद अब विद्युत उत्पादन शुरू होने में करीब दो महीने का वक्त और लगेगा।
दरअसल काशीपुर के ग्राम खाईखेड़ा में श्रावंथी एनर्जी कंपनी ने 450 मेगावाट क्षमता के गैस आधारित पावर प्रोजेक्ट की नींव रखी थी। जून 2010 में शुरू हुआ प्लांट का काम वर्ष 2012 में पूरा हो गया था।
प्लांट को गेल की पाइप लाइन से विद्युत उत्पादन के गैस मुहैया कराई जानी थी। लेकिन गैस नहीं मिलने से उत्पादन शुरू नहीं हो सका। बताया जाता है कि कंपनी ने विद्युत उत्पादन के लिए जरूरी स्टाफ भी रख लिया था।
इसी बीच कंपनी लगातार भारत सरकार से गैस उपलब्ध कराने की मांग करती रही। लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी उसे सफलता नहीं मिल सकी थी। लेकिन अब भारत सरकार ने गैस मुहैया कराने पर सहमति दे दी है। कंपनी के जीएम के राव ने बताया कि भारत सरकार ने बिजली उत्पादन के लिए जरूरी गैस मुहैया कराने पर हामी भर दी है।
गेल की पाइप लाइन से ही प्लांट को गैस मिलेगी। बिजली उत्पादन के लिए प्लांट को तैयार करने का काम चल रहा है। अभी उत्पादन शुरू होने में दो महीने का वक्त लगेगा। पहले चरण में 225 मेगावाट की यूनिट शुरू करेंगे। उसके रनिंग में आने के बाद दूसरी यूनिट भी शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि उत्पादित बिजली बेचने को लेकर सरकार के नए फैसले की उन्हें जानकारी नहीं है।
मशीन खराब, उत्पादन ठप
कटईयां गांव में लगे गैस आधारित विद्युत परियोजना गामा इंफ्रापोप प्राइवेट लिमिटेड में बिजली उत्पादन 20 मई से बंद चल रहा है। 225 मेगावाट क्षमता के प्लांट में मार्च 2015 से बिजली उत्पादित की जा रही थी।
कंपनी के जीएम वीके आनंद ने बताया कि मशीन में दिक्कतों की वजह से अभी प्लांट में उत्पादन 20 मई से बंद पड़ा है। मशीन ठीक कराने के लिए बाहर भेजी गई है। मशीन ठीक होने के बाद ही उत्पादन शुरू हो सकेगा।
बीटा कंपनी के प्लांट में पसरा सन्नाटा
श्रावंथी, गामा की तरह महुवाखेड़ागंज में बीटा इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड ने भी गैस से बिजली उत्पादन करने के लिए 225 मेगावाट क्षमता का प्लांट लगाया था। लेकिन चार साल पहले बने प्लांट भी गैस नहीं मिलने की वजह से चल नहीं सका।
वर्तमान में प्लांट में सन्नाटा पसरा हुआ है। स्टाफ के नाम पर गेट पर दो सुरक्षाकर्मी ही तैनात हैं। पूछने पर वह कहते हैं कि तीन साल से यहां कोई नहीं आया है। यह प्लांट शुरू होने से पहले ही बंद हो गया।