पंतनगर। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन से ही त्रेतायुग का प्रारंभ माना जाता है। कहते हैं इस दिन किए कार्यों से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्या डाॅ. मंजू जोशी ने बताया कि इस बार अक्षय तृतीया पर कुछ विशेष योग बन रहे हैं। रोहिणी नक्षत्र, रवि योग, शोभन योग, गजकेसरी योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, लक्ष्मी नारायण योग, मालव्य योग और मीन राशि में शुक्र, राहु, बुध और शनि की युति से चतुर्थ ग्रही योग का निर्माण हो रहा है। इसके अलावा चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में रोहिणी नक्षत्र में, सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में व शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में होने से अक्षय तृतीया के फल को और भी विशेष बनाते हैं।