देवेंद्र पींचा, एसआईटी प्रभारी।
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रुद्रपुर। एसआईटी को विद्यार्थियों का अधूरा रिकॉर्ड मुहैया कराने का मामला अब समाज कल्याण सचिव तक पहुंच गया है। एसआईटी प्रभारी देवेंद्र पींचा ने बताया कि मामले में सचिव ने नाराजगी जाहिर करते हुए जिला समाज कल्याण अधिकारी को एसआईटी का सहयोग करने और समय से रिकॉर्ड देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सवाल भी किया कि नोटिस के बावजूद रिकॉर्ड देने में इतना समय आखिर क्यों लगाया जा रहा है।
दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा करने के लिए गठित एसआईटी ने ऊधमसिंह नगर में भले ही जांच शुरू कर दी हो लेकिन समाज कल्याण विभाग की ओर से उन्हें पूरा रिकॉर्ड नहीं दिया जा रहा है। जिले के 215 कॉलेजों में वर्ष 2011 से 2018 तक एक लाख 15 हजार एससी, एसटी और ओबीसी के विद्यार्थियों को अलग-अलग कोर्स कराने के नाम पर लाखों रुपये की छात्रवृत्ति आवंटित की गई थी। एसआईटी से जुड़े सूत्रों के अनुसार विद्यार्थियों का रिकॉर्ड नहीं मिलने पर जांच रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है।
समाज कल्याण विभाग ने जो रिकॉर्ड एसआईटी को सौंपा है, उसमें कई तरह की अनियमितताएं पाई गई हैं। एसआईटी ने कुछ समय पहले जिला समाज कल्याण अधिकारी नवीन भारती को नोटिस भेजकर सही रिकॉर्ड समय से देने का अनुरोध किया था। इसी नोटिस की एक प्रतिलिपि समाज कल्याण सचिव और निदेशक को भी भेजी गई थी।
मामले में समाज कल्याण सचिव ने संज्ञान लेते हुए समाज कल्याण विभाग और एसआईटी को जवाब वापस भेजा है। इसमें उन्होंने रिकॉर्ड नहीं मिलने पर नाराजगी जताते हुए समाज कल्याण अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि एसआईटी को जिस रिकॉर्ड की आवश्यकता है, वह समय से दिए जाएं ताकि जांच में व्यवधान न पड़े।
60 करोड़ के घोटाले का खुलेगा राज
रुद्रपुर। जिले के 215 शैक्षिक संस्थानों की जांच पूरी होने पर 60 करोड़ रुपये के घोटाले का राज खुलेगा। एसआईटी सूत्रों के अनुसार जिले में प्रदेश का सबसे बड़ा छात्रवृत्ति घोटाला हुआ है। एसआईटी इससे पहले बाहरी राज्यों के 58 शैक्षिक संस्थानों में 14 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा कर चुकी है। (संवाद)