शांतिपुरी में पट्टों की आड़ में धड़ल्ले से अवैध खनन हो रहा है। पुलिस-प्रशासन और वन विभाग का भारी भरकम महकमा भी अवैध खनन को रोकने में कामयाब नहीं हो पा रहा है। खान विभाग की पेनाल्टी पर पेनाल्टी के बाद भी पट्टाधारक चोरी करने से बाज नहीं आ रहे हैं और धड़ल्ले से दिनदहाड़े नदियों का सीना छलनी किया जा रहा है।
अमर उजाला की टीम जब खनन का जायजा लेने सुबह आठ बजे शांतिपुरी खनन क्षेत्र में पहुंची तो वहां धड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा था। पट्टों की आड़ में बुग्गियां नदी से रेता-बजरी ढो रही थीं। दर्जनों गाडिय़ां में उपखनिज भरा जा रहा था। जैसे ही अमर उजाला की टीम ने फोटो खींचना शुरू किया, तो कुछ लोगों ने उनसे पूछना शुरू कर दिया। कौन से पेपर से हो। थोड़ी देर में पट्टाधारकों के फोन घनघनाने लगे। अमर उजाला की टीम नदी में उतरी तो नदी में पाइप डालकर पानी का रास्ता डायवर्ट किया गया था।
जब टीम ने पूछा कि नदी में पाइप डालने की परमिशन ली गई है तो पट्टे के एक कर्मचारी ने तपाक से उत्तर दिया, जी हां एसडीएम साहब यहां आए थे और उन्होंने पाइप डालने पर कुछ नहीं कहा। नदी खोदने के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि कहां से खोदें इस बार बारिश नहीं हुई तो पट्टों में माल नहीं आया। इसलिए नदी से ही उपखनिज उठा रहे हैं। टीम ने चंदन बिष्ट, संदीप कार्की, दीवान सिंह, मनमोहन सिंह और राम सिंह के पट्टों को देखा तो वहां खुलेआम अवैध खनन चल रहा था। इधर, उपनिदेशक खनन राजपाल लेघा ने बताया कि 10 दिन पूर्व छापेमारी अभियान चलाया था। जिसमें चंदन बिष्ट, संदीप कार्की, दीवान सिंह, मनमोहन सिंह और लक्ष्मी पपोला पट्टाधारकों पर अवैध खनन में पेनाल्टी डाली थी।