विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने स्कूलों की पढ़ाई का गणित बिगाड़ दिया है। एक महीने तक एसआईआर की ड्यूटी करने के बाद स्कूल लौटे शिक्षकों के सामने अब अर्धवार्षिक परीक्षा और अधूरा पाठ्यक्रम बड़ी चुनौती बन गया है।
अक्तूबर में अर्धवार्षिक परीक्षाएं प्रस्तावित हैं और कई कक्षाओं में अभी तक आधा कोर्स भी पूरा नहीं हो पाया है। ऊधमसिंह नगर में तीन जून को एसआईआर का प्रशिक्षण हुआ और आठ जून से काम शुरू हो गया। आठ जुलाई को स्कूल खुले तो शिक्षक लौटे लेकिन तीन अगस्त से फिर से उन्हें एसआईआर में लगा दिया गया।
पूरा अगस्त शिक्षक घर-घर सत्यापन में जुटे रहे। तीन सितंबर से शिक्षक स्कूल लौटना शुरू हुए हैं यानी बच्चों को पढ़ाने के लिए अब सिर्फ एक महीना बचा है। शिक्षकों का कहना है कि लंबी गैर-शैक्षणिक ड्यूटी के बाद अब कोर्स पूरा कराने का दबाव है। पढ़ाई की रफ्तार बढ़ानी पड़ेगी, जिसका सीधा असर बच्चों पर पड़ेगा।
तीन हजार शिक्षक लगे डयूटी में
ऊधमसिंह नगर जिले में तीन हजार से अधिक शिक्षकों की ड्यूटी एसआईआर में लगाई गई थी। अगस्त भर वे स्कूल से बाहर रहे। अभी तक करीब आधे शिक्षक ही लौट पाए हैं, बाकी 30 सितंबर तक एसआईआर पूरा होने के बाद लौटेंगे। उनकी गैर-मौजूदगी में स्कूलों में वैकल्पिक व्यवस्था से पढ़ाई कराई गई।
घर-घर संपर्क नहीं, घटा नामांकन
हर साल जुलाई-अगस्त में शिक्षक घर-घर जाकर सरकारी स्कूलों में नामांकन के लिए प्रेरित करते हैं। इस बार एसआईआर के कारण यह अभियान प्रभावित हुआ जिससे छात्र संख्या बढ़ाने के प्रयासों को झटका लगा है।
हर बूथ पर शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी। बड़ी संख्या में शिक्षक लौट आए हैं। उनकी अनुपस्थिति में पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी गई। वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी। -हरेंद्र कुमार मिश्रा, सीईओ