पंतनगर सिडकुल में नोटबंदी के एक महीने बाद भी कैश की किल्लत से सिडकुल की व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पाई है। एक महीने के भीतर सिडकुल का ट्रांसपोर्ट कारोबार 50 प्रतिशत गिर गया है। इससे 500 से अधिक ट्रांसपोर्टर से जुड़े दस हजार से अधिक कर्मचारी और अधिकारी सीधे तौर पर प्रभावित हो गए हैं। अब हालत यह हैं कि कैश की किल्लत से माल के ढुलान और लदान के लिए ट्रकों को एक-एक सप्ताह तक खड़े रहना पड़ रहा है। वहीं यहां से चेन्नई, गुजरात और कोलकाता जाने वाले ट्रकों को अब अपने गंतव्य तक जाने में 10 से 12 दिन लग रहे हैं। ट्रकों में डीजल डलवाने के लिए कैश की कमी के कारण वह अपने एटीएम कार्डों के जरिए रुक-रुककर मात्र दो-दो हजार रुपये का डीजल डलवाकर माल के लदान और ढुलान में लगे हैं। ऐसे में कारखानों का काम प्रभावित हो रहा है।
पंतनगर सिडकुल में 500 ट्रांसपोर्टरों में प्रत्येक के पास ढाई सौ से लेकर एक-एक हजार ट्रक हैं। इनका सिडकुल के उत्पादन में कच्चा और पक्का माल ढुलान में बड़ा सहयोग है। ऐसे में कैश की किल्लत ने सिडकुल के ट्रांसपोर्ट कारोबार को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है। इस बारे में सिडकुल के एवीपी लॉजिस्टक प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधन रामकृपाल यादव का कहना है कि नोटबंदी के बाद से पहले शुरू में पुराने नोटों का प्रचलन पेट्रोल पंपों पर चल रहा था तो उससे ट्रक में डीजल डलवाने में कोई दिक्क्त नहीं हो रही थी, लेकिन एकाएक 13 नवंबर के बाद से व्यापार पर भारी प्रभाव पड़ा है। उन्होंने बताया कि आज 8 दिसंबर तक की ही बात करें तो ट्रांसपोर्ट कारोबार 50 प्रतिशत तक गिर गया है। माल भेजने में लिए जो गाड़ी चेन्नई, गुजरात और कोलकाता एक सप्ताह में पहुंच जाती थी वह 10 से 12 दिन में पहुंच रही है। इससे धंधा पूरी तरह से चौपट होने की स्थिति में है।