झनकईया थाना पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने शारदा सागर के निकट से साइबेरियन पक्षियों के शिकार करने वाले चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है अलबत्ता जिला मुख्यालय में अधिकारियों की बैठक के चलते पक्षियों का पोस्टमार्टम नहीं हो सका है और आरोपी अभी तक वन विभाग के कब्जे हैं।
झनकईया थाना पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने बुधवार को शारदा सागर में आने वाले मेहमान पक्षियों का शिकार करने वाले चार शिकारियों को मय 31 मृत पक्षियों के साथ धर दबोचा था। वन विभाग ने पकड़े गए सिसैया बंधा निवासी सुरेश कुमार, वनमहोलिया निवासी रामलाल, विनोद और बंदरभोज माधोटांडा जनपद पीलीभीत निवासी शिव कुमार को धर दबोचा था जो अब वन विभाग के कब्जे में हैं। वनक्षेत्राधिकारी एससी मेंदोला ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उच्चाधिकारियों से वार्ता हो रही है। पोस्टमार्टम होने के बाद ही उनके खिलाफ अंतिम कार्रवाई होगी।
सुरई रेंज के अंतर्गत आने वाले शारदा सागर में यूरोप से आने वाले साइबेरियन पक्षियों का शिकार कोई नई बात नहीं है। पुलिस और वन विभाग हर वर्ष इन पक्षियों के शिकारियों के खिलाफ जाल बिछाता है लेकिन उसके बावजूद इन पक्षियों का शिकार लगातार जारी है। स्थिति यह है कि कुछ लोगों ने इसे आजीविका का साधन बना लिया है और जहर देकर इन पक्षियों का शिकार करते हैं और 250 से 300 रुपये प्रति पक्षी के हिसाब से आसपास के क्षेत्रों और नेपाल में बेचते हैं।
वन विभाग वर्ष 2012-13 से अब तक चार बार में 10 शिकारी पकड़ सका है जिसमें यह घटना सबसे बड़ी है।
भारत नेपाल सीमा पर स्थित शारदा सागर जिसका एक तिहायी हिस्सा उत्तराखंड के सुरई रेंज के अंतर्गत आता है जिसमें अधिकांश क्षेत्र में लोग बस गए हैं और खेती करते हैं। जबकि दो तिहायी हिस्सा उत्तर प्रदेश के अंतर्गत आता है। शारदा सागर के दो प्रदेशों के बीच होने के कारण पक्षियों की सुरक्षा संबंधी दोनों प्रदेशों की हर साल बैठक होती है लेकिन कोई कारगर योजना तैयार नहीं हो पाती है ताकि पक्षियों के शिकार पर पूरी तरह से अंकुश लगाया जा सके।
अक्तूबर माह में यूरोप के कई देशों से आने वाले यह गर्म तासीर के पक्षी भारत, पाकिस्तान, बंगलादेश के जलाशयों में अक्तूबर में आते हैं उसी समय से इनका शिकार शुरू हो जाता है। पुलिस और वन विभाग इस क्षेत्र में आने वाले शिकारियों पर अंकुश लगाता है लेकिन पक्षियों का शिकार होता रहता है। वन विभाग के रिकार्ड के अनुसार वर्ष 2012-13 में 13 पक्षियों के साथ चार शिकारी पकड़े गए थे जिन्हें 25 हजार रुपये जुर्माना वसूलने के बाद छोड़ा गया था।
वहीं, 2014-15 में दो घटनाओं में दो पक्षियों के साथ दो शिकारी पकड़े गए थे, जिन्हें जेल भेजा गया। पुलिस और वन विभाग का 31 पक्षियों सहित चार शिकारियों का एक साथ पकड़ा जाना सीमावर्ती क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।