काशीपुर। सूर्या फैक्टरी में हाइड्रोजन सिलिंडर फटने से सीतापुर के महौली क्षेत्र के ग्राम पेरवाडीह के श्यामू यादव के जीवन पर विराम लग गया। वह अपने पीछे पत्नी, तीन लड़कियों और एक लड़के को छोड़ गया है। सबसे बड़ी बेटी की उम्र महज पांच साल है। श्यामू की मौत ही उसे वापस बुलाकर काशीपुर लाई थी।
परिजनों ने बताया कि करीब 15 दिन घर पर बिताकर पांच दिन पहले ही वह लौटा था। यहां फैक्टरी में काम आने पर उसे बुलाया गया था। चंद पैसों के लिए गरीबी उसे वापस मौत के मुंह में खींच लाई थी। शुक्रवार शाम करीब साढ़े पांच बजे श्यामू का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
बृहस्पतिवार सुबह करीब 10:30 बजे सूर्या रोशनी लिमिटेड फैक्टरी में दो हाइड्रोजन सिलिंडर फटने से बड़ा हादसा हो गया था। घटनास्थल पर मौजूद श्यामू के दोनों पैर कट कर अलग हो गए थे। एक पैर देर शाम तक नहीं मिला। ऐसे में बॉडी को बिना पैर के ही पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था। हादसे में घायल रोहित की भी हालत गंभीर बनी हुई है। अन्य 11 लोगों का भी इलाज चल रहा है।
बेटे का शव लेने पहुंचे पिता हरिपाल ने बताया कि उन्हें बताया गया कि उनके बेटे को चोट आई है। जब वह बरेली पहुंचे, तो कंपनी वालों ने बताया कि हादसे में श्यामू की मौत हो गई है। यह सुनकर उनका कलेजा फट गया और गाड़ी में ही चीख-पुकार मच गई।
श्यामू के भाई दीपू ने बताया कि देर शाम जब वह काशीपुर पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि शव पोस्टमार्टम हाउस में है जिसे सुबह ही देख सकेंगे। ऐसे में परिजन पूरी रात बेटे को आखिरी बार देखने के लिए इंतजार करते रहे। सुबह पोस्टमार्टम हाउस में कागजी प्रक्रिया पूरी होने पर शव उनके सुपुर्द कर दिया गया।
शाम करीब पांच बजे वह गांव पहुंचे और उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उन्होंने बताया कि कंपनी वालों ने परिवार की हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है। सहायता के तौर पर पांच लाख रुपये और हर महीने पेंशन देने की बात कही है।
चार भाइयों में सबसे बड़ा था श्यामू
श्यामू यादव (29) चार भाइयों में सबसे बड़ा था। उसका एक छोटा भाई विष्णु दिल्ली में नौकरी करता है जबकि अन्य दो भाई महेश और दीपू घर पर ही रहते हैं। उसकी दो बहनें हैं, जिनमें एक की शादी हो गई है। श्यामू की सबसे बड़ी बेटी पांच साल, दूसरी चार साल, तीसरी तीन साल और एक बेटा डेढ़ साल का है। श्यामू काशीपुर के हरियावाला में अकेला रहता था। वह महीने के 18 से 22 हजार रुपये कमा लेता था और दो से तीन महीने में घर पर जाता था।
मलबे में साढ़े सात घंटे बाद मिला पैर
श्यामू का एक पैर कटकर फैक्टरी में दूर गिरा था। ऐसे में मौके उसके शव को बिना पैर के ही पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। सुबह 10:30 बजे हादसा हुआ था और शाम छह बजे फैक्टरी में पैर मलबे में मिला। फैक्टरी प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी। थाना प्रभारी हरेंद्र चौधरी ने बताया कि फैक्टरी वालों की सूचना पर पैर बरामद कर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा दिया था।