कोरोना काल में मजदूरों के न मिलने से खेती और बागवानी भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में काशीपुर के एक बागवान ने पिछले कोरोना काल में बागवानी के लिए बाहरी प्रदेेेशों के मजदूर न मिलने पर स्थानीय मजदूरों को बागवानी का प्रशिक्षण दिया। इससे इस कोरोना काल में बागवान के आगे मजदूरों की कमी का संकट खत्म हुआ और कई स्थानीय मजदूरों को भी रोजगार मिला है।
काशीपुर कृषि बहुल क्षेत्र होने के कारण यहां सैकड़ों लोग खेती और बागवानी करते हैं। बागों में काम करने के लिए अधिकांश मजदूर यूपी और बिहार से हर साल यहां आते हैं। पिछले साल कोरोना काल में लॉकडाउन लगने के कारण बाहरी प्रदेशों के मजदूर वापस लौट गए और बागवानी के लिए स्थानीय मजदूर नहीं मिले। ऐसे में रामनगर रोड स्थित चतुर्वेदी बाटनिकल गार्डन के मालिक स्वेतांशु चतुर्वेदी ने स्थानीय मजदूरों को बागवानी का प्रशिक्षण दिया। जिसमें मजदूरों को फलदार पेड़ों की देखरेख करना, फल तोड़ना, उनकी पैकिंग करना, पौधों को सही समय और सही मात्रा में खाद पानी देना सिखाया।
इस साल भी कोरोना काल में बाहरी प्रदेशों से काफी कम संख्या में मजदूर आए हैं। इसमें से भी कई ने लॉकडाउन लगने के आशंका से वापस जाना शुरू कर दिया है। इससे खेती और बागवानी प्रभावित हो रही है लेकिन ऐसे समय में भी स्वेतांशु के बाग में मजदूरों की कमी नहीं है। पिछले साल प्रशिक्षित किए गए स्थानीय मजदूरों से वह काम ले रहे हैं। इससे उनकी आय भी प्रभावित नहीं हो रही है और कई स्थानीय मजदूरों को रोजगार भी मिल रहा है। स्वेतांशु बताते हैं कि मजदूरों से कोविड नियमों के अनुसार काम लिया जा रहा है। किसी भी संकट में परिस्थितियों का हिम्मत के साथ मुकाबला किया जाए तो संकट साहस से बड़ा नहीं हो सकता।