काशीपुर। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन से सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी मांगी गई थी। सूचना में शून्य लिखाकर दिए जाने से विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिह्न लगा गया है।
ग्राम करनपुर गिरधई मुंशी निवासी कुलदीप सिंह पुत्र सुच्चा सिंह ने 24 जनवरी को आरटीआई के तहत ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता ई.गोविंद सिंह कार्की से पांच बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। इसमें सरकारी विभागों में चल रहे बिजली मीटरों की कनेक्शन संख्या, उन पर बकाया बिल और वसूली को लेकर गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा गया था।
इस पर अधिशासी अभियंता ने लोक सूचना अधिकारी/उपखंड अधिकारी प्रथम व द्वितीय को 5 फरवरी को पत्र जारी कर मांगी गई सूचना का जबाव देने के लिए कहा था।
उधर, लोक सूचना अधिकारी/उपखंड अधिकारी ई.सद्दाम अली ने कुलदीप सिंह को 27 फरवरी को जबाव पंत्राक से उपलब्ध कराया गया। कुलदीप सिंह ने बताया जब उन्होंने सूचना प्राप्त हुई तो वह देखकर भौचक्के रह गए। क्योंकि लोक सूचना अधिकारी/उपखंड अधिकारी ने पांच बिंदुओं के आगे शून्य लिखा है।
ऐसे में सवाल उठता है कि बिजली विभाग आम उपभोक्ताओं के खिलाफ बिजली चोरी या बकाया बिल को लेकर सख्त कार्रवाई करता है। मामूली बकाया पर भी हजारों की पेनाल्टी लगाई जाती है। अधिकांश मामलों में प्राथमिकी दर्ज होती है। जब बात सरकारी विभागों की आती है तो यह शून्य वाली कहानी कई सवाल खड़े कर रही है। आखिर सरकारी दफ्तरों के मीटर, बकाया बिल और कार्रवाई का रिकॉर्ड शून्य कैसे हो सकता है ?
आरटीआई कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि यह जवाब न सिर्फ आरटीआई के खिलाफ है। बल्कि सच्चाई छिपाने का भी संकेत देता है। कहीं ऐसा तो नहीं कि सरकारी विभागों के भारी भरकम बकाया बिल और अनियमितताओं को छिपाने के लिए यह शून्य का खेल खेला गया हो।