खटीमा के मोहम्मदपुर भुड़िया में शहीद वीरेंद्र सिंह राणा की पत्नी रेनू बताते हुए।
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शहीद वीरेंद्र सिंह राणा की पत्नी रेनू राणा का कहना है कि आतंकियों और पाकिस्तान को सबक सिखाना ही होगा। बोलीं कि खून का बदला खून से लेना होगा। रविवार को शहीद के गांव मोहम्मदपुर भुड़िया में वीरेंद्र सिंह के घर काफी संख्या में सुबह से ही नाते रिश्तेदार सांत्वना देने पहुंच गए थे।
शहीद वीरेंद्र सिंह की गमजदा पत्नी ने इस दौरान बताया कि 14 फरवरी की सुबह करीब सात बजे उनका फोन आया। उन्होंने बताया था कि नाश्ता करने के बाद गाड़ी में बैठ गए हैं। इसके बाद फोन बंद हो गया। रेनू राणा ने कहा कि नौकरी मिली तो बच्चों को खूब पढ़ा लिखाकर अफसर बनाएंगी। पाकिस्तान की कायराना हरकत पर कहा कि आतंकियों को छोड़ना नहीं चाहिए। बदल लेना ही होगा और खून का बदला खून से ही चाहिए।
घर के आंगन में बैठे पिता दीवान सिंह, बड़े भाई जयराम, भतीजे राहुल और रिश्तेदार प्रवेश कुमार मौर्य आदि ने कहा कि अब तो सिर्फ वीरेंद्र की यादें रह गईं हैं। वीरेंद्र में देशभक्ति का जज्बा और जुनून था, लेकिन अब सिर्फ यादें ही रह गईं हैं।
2012 में बाल-बाल बच गए थे वीरेंद्र
शहीद वीरेंद्र सिंह की पत्नी रेनू ने बताया कि वर्ष 2012 में जब उनके पति वीरेंद्र सिंह छत्तीसगढ़ में तैनात थे, तब नक्सलियों के बम ब्लास्ट में उनकी गाड़ी का एक ओर का हिस्सा उड़ गया था, जिसमें वह बाल-बाल बच गए थे।
शहीद के भांजे अतीश ने दी थी आतंकी हमले की सूचना
खटीमा। शहीद वीरेंद्र की बहन रिच्छा के तीन पुत्रों में दो सीआरपीएफ और एक एसएसबी में तैनात हैं। शहीद के पिता दीवान सिंह ने बताया कि 14 फरवरी को जब पुलवामा में आतंकी हमला हुआ तो छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ में तैनात रिच्छा के पुत्र अतीश का अपने घर फोन आया। उसी ने आतंकी हमले की जानकारी दी।
तब बहन रिच्छा मायके आई और पूछा की भाई का फोन आया या नहीं। इसके बाद शहीद के तीन फोन नंबरों पर परिजन लगातार फोन करते रहे, लेकिन सब बंद आए। रात दस बजे 45वीं बटालियन के काफिले पर हमले की सूचना से ही परिवार में कोहराम मच गया।