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डकैती के सात आरोपियों को सात-सात साल की सजा

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काशीपुर। पांच वर्ष पूर्व गढ़ीनेगी के कांग्रेसी नेता कृष्ण कुमार सुखीजा के घर पड़ी डकैती के सात आरोपियों को द्वितीय अपर जिला जज ने सात-सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही आरोपियों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने आरोपियों को धमकाने, आपराधिक षड्यंत्र रचने और आर्म्स एक्ट के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
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23/24 जुलाई 2013 की रात बोलेरो से ग्राम गढ़ीनेगी निवासी कांग्रेसी नेता कृष्ण कुमार सुखीजा के घर पहुंचे बदमाशों ने परिजनों को बंधक बना लिया था। बदमाशों ने सुखीजा के परिजनों से मारपीट कर लाइसेंसी बंदूक, लाखों के जेवरात, एक लाख की नकदी और तीन मोबाइल लूट लिए थे। सुखीजा की तहरीर पर कुंडा थाने में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ धारा 395, 397, 342 और 506 के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया था। 27 जुलाई 2013 को कुंडा थाना प्रभारी मनीष उपाध्याय के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कुदईयांवाला में डकैती के माल का बंटवारा कर रहे छह आरोपियों भोजपुर, मुरादाबाद निवासी पृथ्वी, विनोद, महेंद्र, धीमरखेड़ा, काशीपुर निवासी संजय, गढ़ीनेगी निवासी तरुण और एक किशोर को गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने उनकी निशानदेही पर लूटे गए जेवरात, 80 हजार की नकदी, लाइसेंसी बंदूक, अवैध तमंचा और एक मोबाइल फोन बरामद किया था। पुलिस पूछताछ में बदमाशों ने अपने दो अन्य साथियों के नाम पुलिस को बताए थे। बाद में पुलिस ने फरार चल रहे थाना मूढ़ापांडे, मुरादाबाद निवासी अफसर अली और थाना भोजपुर निवासी बलवीर को गिरफ्तार कर लिया था।
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कुंडा पुलिस ने इस मामले में विवेचना पूर्ण कर सभी आठ आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। एक आरोपी के किशोर होने के कारण उसकी पत्रावली अलग से कर किशोर न्याय बोर्ड भेजी गई। इस मुकदमे का विचारण द्वितीय एडीजे ओमकुमार की अदालत में हुआ। अभियोजन पक्ष की ओर से मुकदमे के वादी कृष्ण कुमार, अभिषेक, डॉ. मदन मोहन, एसआई जयपाल सिंह, लाखन सिंह, अरुण कुमार आदि को परीक्षित कराया गया।
इन सभी ने अभियोजन पक्ष के कथानक का समर्थन किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने सातों आरोपियों को बंधक बनाकर डकैती करने का दोषी पाया। अदालत ने आरोपियों को धारा 506 व 120 बी के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। अभियुक्त संजय और विनोद पर आर्म्स एक्ट का आरोप भी सिद्ध नहीं हो सका।
अदालत ने सातों आरोपियों को धारा 395, 397 व 412 में सात-सात वर्ष की सजा एवं पांच-पांच हजार रुपया जुर्माना लगाया। धारा 342 में आरोपियों को एक-एक वर्ष की सजा व एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर दोषियों को एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
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