गल्फार कंपनी द्वारा उत्तराखंड की नदियों में बेतरतीब ढंग से खनन कर करोड़ों के वारे-न्यारे किए जा रहे हैं। प्रशासन के कई दौर के छापों में करोड़ों रुपए की पैनाल्टी डाली गई। लेकिन आला अफसरों की मेहरबानी के कारण ये जुर्माना सिर्फ कागजी कार्रवाई तक ही सीमित है। उच्चाधिकारियों की ढुलमुल रवैये से कंपनी के अवैध खनन के कारोबार का धंधा जोरशोर से चल रहा है।
यूएई की गल्फार कंपनी सितारगंज से हरिद्वार तक फोरलेन का निर्माण कर रही है। इसके लिए उत्तराखंड की नदियों में कंपनी द्वारा बेतरतीब ढंग से रेत, मिट्टी और पत्थर का अवैध खनन का कार्य कराया जा रहा है। बीती 20 नवंबर को तत्कालीन एसडीएम ईला गिरी और तहसीलदार आरसी गौतम ने उकरौली नदी में गल्फार कंपनी द्वारा 50 हजार घनमीटर अवैध खनन करने और 40 हजार 480 घनमीटर खनन सामग्री का अवैध भंडारण पाया था। तहसीलदार ने कंपनी पर 3 करोड़ 15 लाख 25 हजार का जुर्माना लगाकर रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी थी। 13 जनवरी को मीरा बारा राणा क्षेत्र में मिट्टी के अवैध खनन आदि को लेकर जिला प्रशासन ने गल्फार कंपनी पर 8 करोड़ का जुर्माना किया था और सप्ताह भर के भीतर जुर्माने की धनराशि का भुगतान करने की मोहलत दी थी।
23 जनवरी को तत्कालीन एसडीएम पूरन सिंह राणा ने पीलीभीत मार्ग पर गल्फार के स्टाक में छापेमारी की थी। यहां 41 हजार 87.77 घनमीटर अवैध भंडारण मिलने पर 1 करोड़ 85 लाख 14 हजार 498 रुपए का जुर्माना और 27 जनवरी को उकरौली गांव में गल्फार के खनन स्टाक की जांच करने पर 9740 घनमीटर अवैध स्टाक मिलने पर 22 लाख 63 हजार 638 रुपए के जुर्माना की कार्रवाई कर फाइल डीएम को भेजी थी। लेकिन, ये सभी फाइलें अभी तक जिला प्रशासन में दबी हुई हैं।
वन निगम के डीएलएम ने बताया कि गल्फार कंपनी द्वारा नंधौर नदी में छह लाख घनमीटर खनन किया जाना है। बीते दिन रंसाली रेंज के क्षेत्राधिकारी बीपी पंत ने गल्फार कंपनी पर विभाग का रायल्टी, रोड टैक्स आदि 12.38 लाख रुपए बकाया होने पर नंधौर नदी के एमबीआर गेट पर वाहन रोक दिए थे। शासन व आला अफसरों की मेहरबानी से कंपनी द्वारा किए गए अवैध खनन व स्टाक के जुर्माने की वसूली से उच्चाधिकारी बच रहे हैं। यही नहीं कंपनी के लोग भी बेखौफ होकर नदी को खोखला करने में लगे हैं। इस संबंध में गल्फार कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर संतोष कुमार शर्मा ने बताया कि नंधौर नदी में डीएलएम और ठेकेदार के बीच मौखिक सहमति के आधार पर ही खनन के लिए वाहन भेजे गए थे।