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सुनसान मार्ग को बनाया अपराध का रास्ता

Tue, 08 Dec 2015 12:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/सितारगंज।
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औद्योगिक नगरी से कुमाऊं के द्वार को निकलने वाले जंगल के सुनसान रास्ते को अपराधियों ने क्राइम का रास्ता बना दिया। घटना को शातिराना अंदाज में अंजाम देने वाले हत्यारों के दिमाग के आगे पुलिस भी चकरा गई है। नौ दिन बाद पुलिस को लापता मां-बेटे की लाशें मिल सकीं। साथ ही कुछ महत्वपूर्ण सुराग भी हाथ लगे हैं।
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 सितारगंज से काठगोदाम तक 55 किमी के बीच तराई-पूर्वी वन प्रभाग में साल व सागौन का घना जंगल है। काठगोदाम के बाद 28 किमी (चोरगलिया तक) पुलिस की एक भी चौकी नहीं है। चोरगलिया से सितारगंज के बीच मे सिडकुल में पुलिस की चौकी स्थापित है। लेकिन इन दोनों जगहों पर अपराधी पुलिस को चकमा देकर निकल आए और थाने व चौकी की पुलिस को भनक तक नहीं लगी। माना जा रहा है कि 27 नवंबर को रात दस बजे काशीपुर एक्सिस बैंक के एटीएम से निकलने के बाद राजेंद्र जोशी, उसकी मां कमला जोशी और आठ साल के बेटे भाष्कर जोशी को अपहृत कर लिया गया। 29 नवंबर को भाष्कर जोशी की लाश मिलने से यह तो तय हो गया था कि लापता परिवार अब जिंदा नहीं है। हत्यारों ने काशीपुर से कालाढूंगी होते हुए चोरगलिया के जंगली रास्ते से सिडकुल पहुंचते-पहुंचते तीनों को मौत के घाट उतार दिया और लाशें यहां फेंक गए।
सोमवार की सुबह दस बजे नौ दिन बाद राजेंद्र जोशी और कमला जोशी की लाश भी सिडकुल फेज टू से बरामद हुई। लेकिन, इन लाशों के बारे में जानने या उन्हें लेने के लिए परिवार व अन्य कोई भी रिश्तेदार देर रात तक नहीं पहुंचा। अब मृतक की संपत्ति का वारिस उसका छोटा भाई दीपक जोशी के होने से पुलिस की जांच में हत्याकांड में परिवार के शामिल होने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। एसएसपी भी संपत्ति और प्रेम प्रसंग के कारण हत्या होने पर जोर दे रहे हैं। इन सभी बिंदुओं पर गौर करें तो हत्याकांड को अंजाम देने के लिए घटना से पहले ही प्लानिंग कर ली गई थी और फिर शातिराना अंदाज में पूरे परिवार को ही ठिकाने लगा दिया गया।
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देहरादून के तिहरा हत्याकांड में सोमवार को लापता राजेंद्र जोशी और उसकी मां कमला जोशी की लाशें मिलने से जल्द ही खुलासे की उम्मीद बढ़ गइ है। एसएसपी केवल खुराना की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 29 नवंबर को आठ साल के भाष्कर जोशी की लाश मिलने के बाद शिनाख्त होते ही बिना किसी सीमा विवाद में पड़े एसएसपी ने सितारगंज कोतवाली में तत्काल मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे। बताया जा रहा है कि पुलिस ने घटना के पर्दाफाश के लिए परिवार के कुछ लोगों को पूछताछ के लिए भी उठाया। जिससे लगता है कि पुलिस के हाथ हत्यारों तक पहुंच गए हैं और 72 घंटे के भीतर खुलासा भी हो सकता है।
 देहरादून के तिहरा हत्याकांड का मामला संपत्ति और प्रेम प्रसंग का हो सकता है। पुलिस भी इन्हीं दो बिंदुओं पर प्राथमिकता से जांच कर रही है। एसएसपी केवल खुराना बताते हैं कि तिहरा हत्याकांड कोई रैण्डम घटना नहीं, बल्कि गहरी साजिश है और मामला संपत्ति, प्रेम प्रसंग या फिर रंजिश का हो सकता है। ब्यूरो
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक केवल खुराना ने बताया कि देहरादून और ऊधम सिंह नगर जनपद की दस पुलिस टीमें तिहरा हत्याकांड के खुलासे में लगी हैं। एसओजी के साथ ही काशीपुर इंस्पेक्टर व गदरपुर थानाध्यक्ष भी जुटे हैं।
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