दिनेशपुर रोड पर कट रही अवैध कालोनियों के खेल में जिला प्रशासन फेल हो गया है। प्रशासन पर पूरी तरह हावी होते हुए कालोनाइजरों ने जयनगर से कालीनगर के बीच करीब छह किलोमीटर का सरकारी निर्माण जगह-जगह से ध्वस्त कर दिया है।
जिला प्रशासन को ठेंगा दिखाते हुए जमीन के सौदागरों ने शनिवार को एसडीएम के आदेश पर सीज की गई जेसीबी और हिरासत में लिए गए दो आरोपियों को भी सिडकुल चौकी से छुड़वा दिया। उधर एसडीएम के आदेश भी हवा-हवाई हो गए। एसडीएम ने क्षेत्र के पटवारी को दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश जारी किया था, लेकिन घटना के 36 घंटे बाद भी न तो कोई मुकदमा दर्ज हुआ और नहीं किसी की गिरफ्तारी की गई है।
पिछले कई सालों से दिनेशपुर रोड की बदहाली से वहां के लोग और आसपास के कई ग्रामीण भारी परेशानी से जूझ रहे थे, इस सड़क की मरम्मत के लिए विधायक अरविंद पांडेय सहित कई जनप्रतिनिधियों ने लंबे समय तक आंदोलन भी किया और आखिरकार करोड़ों रुपये की लागत से राज्य सरकार ने इस सड़क की मरम्मत करवाकर इस पर डामरीकरण के साथ ही सड़क के दोनों ओर पानी निकासी के लिए आरसीसी के नाले का निर्माण करवा। जैसे ही इस सड़क की दशा सुधरी तो यहां पर भूमाफियाओं ने जमीनों का खेल ऐसा खेला कि इसमें जिला प्रशासन के कुछ अफसरों से सांठगांठ करके अवैध कालोनियों का निर्माण करना शुरू कर दिया। इसके साथ ही जमीन के सौदागरों और सत्ता से जुड़े कुछ नेताओं ने सरकारी निर्माण को दिनदहाड़े जेसीबी के सहारे तोड़ना शुरू कर दिया। अब हालत यह है कि करीब छह किमी तक के सरकारी निर्माण को कालोनाइजरों ने अपनी कालोनियों के विशाल गेट के लिए न जिला प्रशासन से कोई अनुमति ली और बिना परवाह किए उसे ध्वस्त करना शुरू कर दिया।
उधर इस बारे में एसडीएम अनिल कुमार शुक्ला का कहना है कि जेसीबी मशीन तत्काल सीज कर दी गई थी, आखिर किस आधार पर मशीन को पुलिस चौकी से छोड़ा है इसकी जांच की जाएगी। उधर उन्होंने आरोपियों पर मुकदमा दर्ज न होने पर इसमें क्षेत्र के पटवारी से पूछताछ करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि सरकारी निर्माण को ध्वस्त करना सरासर अपराध है। इसमें कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।