रंग-बिरंगे अपशिष्ट कोकून और उनसे बना बैज।
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जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि पंतनगर के वैज्ञानिकों ने बेकार कोकून से भी रेशम की डोर और थ्रीडी संरचना वाले उत्पाद बनाने की तकनीक ईजाद की है। इसका पेटेंट भी हासिल कर लिया गया है। वैज्ञानिक आईसीएआर परियोजना के तहत मिली वित्तीय मदद से बाजपुर, काशीपुर, सितारगंज, खटीमा और गदरपुर की रेशम कीटपालक महिलाओं को कम गुणवत्ता वाले कोकून से विविध हस्तशिल्प उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने में जुटी हैं।
सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की डीन डॉ. अलका गोयल के निर्देशन में डॉ.दिव्या सिंह और डॉ.शेफाली मैसी ने रेशम के खराब कोकून का उपयोग कर विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प उत्पाद बनाए हैं। तकनीक में ऐसे क्षतिग्रस्त, छेद वाले और दागदार कोकूनों का प्रयोग किया गया, जो ऊंची कीमतों पर नहीं बिक सकते थे।
ऐसे किया गया तैयार
सबसे पहले बेकार कोकून से रेशे निकालकर धागा तैयार किया गया। कोकून को प्रोटीन रंगाई के लिए उपयुक्त एसिड डाई में विभिन्न रंगों में रंगा गया और छायादार स्थान में सुखाया गया। सूखने के बाद कोकून को कलात्मक अवतल और उत्तल आकृतियों में काटा गया। इन कटी हुई आकृतियों को पहले से तैयार रूपरेखा डिजाइन पर चिपकाया गया। इस पेटेंट डिजाइन की विशेषता यह थी कि यह तीनों दिशाओं से एक समान थ्री-डी संरचना प्रस्तुत करता है। यह उत्पाद बेहद टिकाऊ हैं।