शक्तिफाॅर्म के पास स्थित प्रह्लाद पलसिया में निर्माणधीन एक्वा पार्क की जद में आए पीड़ित परिवारों ने भरोसा जताया है कि उनको नए आशियाने और रोजगार जल्द मिलेगा। उन्हें पुराने आशियाने और जमीन छिन जाने का दुख तो है लेकिन सरकार के फैसले के बाद संतोष भी है।
आंदोलन में शामिल रहे उत्तम आचार्य ने शुक्रवार को 17वें दिन धरना समाप्त करने की आधिकारिक घोषणा की। इससे पहले धरने के 16वें दिन जनप्रतिनिधियों और पीड़ित परिवारों से हुई वार्ता में अधिकारियों ने कुछ शर्तों के साथ परिवार को पुनर्वासित करने की मांग को स्वीकार लिया। वार्तालाप में एक्वा पार्क की चहारदीवारी के बाहर 1400 वर्ग फीट में दो बीएचके भवन का निर्माण किए जाने पर दोनों पक्षों ने सहमति जताई। भवन भूमि के आवंटन के बाद परिवार के स्वयं अतिक्रमण हटाने और आवंटित होने वाली भूमि पर कच्चा अथवा पक्का निर्माण कर रहने पर भी सहमति बनी। साथ ही प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को एक्वा पार्क में नौकरी दिए जाने की भी बात कही थी। पीड़ित परिवार पुनर्वास किए जाने की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे। उनके आंदोलन को विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों ने समर्थन दिया था। मत्स्य विभाग के अधिकारियों और प्रशासन के नरम रुख के बाद ही वार्ता सफल होकर किसी नतीजे पर पहुंची।
संवाद
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वर्जन -
एक्वा पार्क में नौकरी और 1400 वर्ग फीट में मकान बनाकर दिए जाने का फैसला हमें स्वीकार है। पुराने आशियाने को छोड़े जाने का दुख है। तो वहीं नया घर बसाने की खुशी भी है।
- सुजीत राय, प्रभावित
16 दिन धरना देने के बाद आखिरकार सरकार ने हटाने से पहले बसाने की मांग को स्वीकार लिया। सरकार से कोई गिला-शिकवा नहीं है।
- सुखदेव राय, प्रभावित
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न्याय के लिए हमें 16 दिन तक संघर्ष करना पड़ा। बड़े नेताओं का साथ देने के लिए धन्यवाद। हमें किसी से कोई नाराजगी नहीं है। हम सरकार के इस फैसले से पूरी तरह से संतुष्ट हैं।
- शंकर राय, पीड़ित
जमीन जाने का अत्यंत दुख है। नए मकान का अलॉटमेंट होने के बाद हम स्वयं अपने कब्जे हटा लेंगे। किसी से कोई नाराजगी नहीं है।
- सुभाष राय, पीड़ित