सितारगंज सिडकुल में लगे कॉमन एंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की गलती से सिडकुल की 87 फैक्ट्रियों में बंदी की तलवार लटक रही है। यदि सीईटीपी प्लांट को बंद किया जाता है तो फैक्ट्रियों को अपने उद्योगों में ईटीपी प्लांट लगाना जरूरी होगा। इसमें महीनों का समय लग जाएगा। तब तक फैक्ट्रियों में उत्पादन नहीं हो सकेगा। इधर, पूरे मामले में पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी ने चार सदस्यीय टीम का गठन किया है। जो शीघ्र ही सिद्ध गर्ब्यांग गांव का निरीक्षण करेगी।
सितारंगज के सिद्ध गर्ब्यांग गांव में इन फैक्ट्रियों से निकलने वाले जहर ने पेयजल को प्रदूषित कर दिया है। हैंडपंपों और नलो से भी विषैला पानी निकल रहा है। सिद्ध गर्ब्यांग कल्याण सेवा समिति ने इस मामले में एनजीटी को चिट्ठी लिखी थी। मामले में दो अप्रैल को सुनवाई की तिथि तय हुई है। पूरे मामले में पीसीबी को सिडकुल में लगे सीईटीपी की गलती नजर आ रही है।
पीसीबी के अधिकारियों के मुताबिक एनजीटी की केंद्रीय समिति और आईआईटी के विशेषज्ञों ने नवंबर 2017 में सीईटीपी से पानी के नमूने लिए थे। वहीं, दिसंबर 2017 के अंत में पीसीबी की क्षेत्रीय और प्रशासन की टीम ने मिलकर गांव से पानी के नमूने लिए थे।
दोनों ही नमूनों की परफारमेंस ठीक नहीं आई थी। सिडकुल सितारगंज में 87 फैक्ट्रियां सीईटीपी से पानी ट्रीट कर छोड़ती हैं। प्लांट और गांव की दूरी करीब 400 मीटर है। पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. अंकुर कंसल ने बताया कि सीईटीपी सही ढंग से पानी का निस्तारण नहीं कर रहा है। प्रथम दृष्टया सीईटीपी की गलती नजर आती है।
उन्होंने बताया कि 12 मार्च को वाटर एक्ट के तहत सीईटीपी प्लांट को बंदी के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही फैक्ट्रियों को भी नोटिस भेजकर फैक्ट्री के प्रदूषित पानी को ट्रीट करने के लिए व्यवस्था करने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि पूर्व में सीईटीपी की दो लाख की बैंक गारंटी जब्त की जा चुकी है। इसके अलावा वाटर एक्ट में सीईटीपी के खिलाफ कोर्ट में आपराधिक मुकदमा दाखिल किया गया है।
टीम में शामिल हैं ये लोग
डॉ. कंसल ने बताया कि चार सदस्यीय टीम में क्षेत्रीय कार्यालय हल्द्वानी के सहायक पर्यावरण अभियंता सुनील आर्या, काशीपुर के सहायक पर्यावरण अभियंता राकेश कंडारी, सिडकुल के आरएम और सिद्ध गर्ब्यांग कल्याण सेवा समिति के अध्यक्ष/सचिव को रखा गया है। निरीक्षण के दौरान भारत सरकार की मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से नमूने एकत्र करवाए जाएंगे। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा की दृष्टि से डीएम से पुलिस फोर्स उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया जाएगा।
प्रति किलोलीटर करीब 55 रुपये देती हैं फैक्ट्रियां
काशीपुर। पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. अंकुर कंसल ने बताया कि सितारगंज सिडकुल की फैक्ट्रियां अपने यहां के दूषित पानी को ट्रीट कराने के लिए सीईटीपी को प्रति किलोलीटर करीब 50 से 55 रुपये का भुगतान करती हैं। प्रतिदिन 2.4 एमएलडी पानी यानि करीब 24 सौ किलोलीटर पानी सीईटीपी को दिया जाता है।