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ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में चल रहा सेंट्रल जेल का प्रशासनिक दफ्तर

Mon, 21 Sep 2015 12:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/ रुद्रपुर।
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संपूर्णानंद शिविर में सेंट्रल जेल की हालत खस्ता है। जेल का प्रशासनिक दफ्तर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के भवन में चल रहा है। जेल में न तो वाच टावर लगाए गए हैं और न ही सीसीटीवी कैमरे, मोबाइल जैमर ही लगे हैं। महिला कारागार व बाल कारागार में भी ताले लटके हैं।
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  संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) की 20 एकड़ भूमि पर 512 कैदियों की क्षमता वाली सेंट्रल जेल की वर्ष 2003 में स्थापना की गई थी। जिसमें 32 एकांतवास हैं। इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा करीब 19 करोड़ रुपये की लागत से 2008 तक सेंट्रल जेल का निर्माण किया गया। उसके बाद से शासन से पैसा नहीं मिलने पर अधूरा निर्माण कर कंपनी ने छोड़ दिया। 2011 से सेंट्रल जेल में दोष सिद्ध कैदियों को रखा जाने लगा। लेकिन, इन कैदियों की सुरक्षा व निगरानी के कोई ठोस उपाय नहीं किए गए। जेल में सिर्फ 297 दोष सिद्ध वाले कैदियों को रखा गया है।
  सुरक्षा के मद्देनजर जेल में न तो वाच टावर है और न ही सीसी कैमरे व मोबाइल जैमर लगाए गए हैं। महिला बंदी रक्षक और संतरी भी नहीं हैं। सेंट्रल जेल में ही महिला व बाल कारागार भी बनी है। इन दोनों कारागार की क्षमता 40 महिला और 40 बाल कैदियों की है। जिनमें महिला व बाल कैदियों को न रखने से ताले लटके हैं। पांच वाच टावर बनने थे। जिनमें एक ही टावर का आधा-अधूरा निर्माण किया गया है। अगर, कारागार विभाग ने इस ओर ध्यान न दिया तो कैदियों के भागने का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा। बता दें कि बीते दिनों दो कैदी भाई यहां से भाग गए थे।
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