रुद्रपुर रोडवेज परिसर में बना नया बस अड्डा। संवाद
रुद्रपुर। तराई के सबसे महत्वपूर्ण रोडवेज बस अड्डे का संचालन इन दिनों पूरी तरह से राम भरोसे है। एक तरफ पुराने भवन के ध्वस्तीकरण ने परिसर को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया है, तो दूसरी तरफ करोड़ों की लागत से बना नया बस अड्डा प्रवेश द्वार न बन पाने के कारण सफेद हाथी साबित हो रहा है।
रोडवेज बस अड्डे पर विगत कई वर्षों से आईएसबीटी टर्मिनल का कार्य चल रहा है। परिसर में नया बस अड्डा बन गया है, लेकिन अतिक्रमण के कारण प्रवेश द्वार का निर्माण नहीं हो पा रहा है। प्रवेश द्वार किच्छा बाईपास किनारे बनना है। जहां पर प्रवेश द्वार बनना है, वहां दुकानें बनी हुई हैं। इन दुकानों के हटने के बाद ही बस अड्डे का प्रवेश द्वार बन पाएगा। प्रवेश द्वार बनने के बाद ही नया बस अड्डा संचालित होगा।
पुराने बस अड्डे के भवन का काफी हिस्सा सड़क चौड़ीकरण के दायरे में आ गया था। बीते दो फरवरी से बस अड्डे के पुराने भवन को ध्वस्त करने का काम चल रहा है। इस वजह से लंबे समय तक पूछताछ कक्ष और मासिक पास कक्ष का भी संचालन नहीं हो पाया। भवन में स्थित कार्यालय कार्यशाला भवन के ऊपरी मंजिलों में शिफ्ट हो गए हैं। ध्वस्तीकरण के चलते बस अड्डा अस्त -व्यस्त पड़ा है। यात्रियों के विश्राम करने तक की व्यवस्था नहीं हैं। बसों के इंतजार में यात्री इधर-उधर भटक रहे हैं।
नये बस अड्डा में अतिक्रमण सबसे बड़ी बाधा
परिसर में नया बस अड्डा (आईएसबीटी टर्मिनल) बनकर तैयार है लेकिन इसके संचालन में प्रवेश द्वार का पेंच फंस गया है। किच्छा बाईपास की ओर जहां मुख्य प्रवेश द्वार बनना है वहां पुरानी दुकानें बनी हुई हैं। जब तक प्रशासन इन दुकानों को हटाकर क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त नहीं करता तब तक निर्माण कार्य पूरा नहीं होगा और न ही टर्मिनल विभाग को हस्तांतरित किया जा सकेगा।
कोट
नए बस अड्डे के लिए प्रवेश द्वार बनना है। प्रवेश द्वार का निर्माण होने के बाद आईएसबीटी टर्मिनल का निर्माण कर रही कंपनी नया बस अड्डा निगम को हस्तांतरित करेगी। अतिक्रमण प्रशासन को हटाना है। - श्रीराम कौशल, सहायक महाप्रबंधक रोडवेज डिपो