काशीपुर। उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद से बिना मान्यता संचालित मदरसों और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों पर अब सख्त कार्रवाई की जा सकेगी। 30 जून 2026 से लागू संशोधित अध्यादेश के तहत प्राधिकरण को ऐसे संस्थानों में तालाबंदी करने, संचालकों पर पांच-पांच लाख रुपये तक जुर्माना लगाने और आवश्यकता पड़ने पर रिसीवर नियुक्त करने का अधिकार मिल गया है। हालांकि मकतब और डिग्री स्तर की शिक्षा देने वाले संस्थान इसके दायरे से बाहर रहेंगे।
नगर निवासी सूचना का अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन एडवोकेट को उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद, देहरादून से मिली सूचना के अनुसार 30 जून 2026 के असाधारण राजपत्र में उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद (संशोधन) अध्यादेश-2026 प्रकाशित किया गया है। इसके तहत अधिनियम की धारा 2, 3, 4, 11, 12, 14 और 18 में संशोधन किया गया है।
संशोधित प्रावधानों के अनुसार कक्षा 8 तक के सक्षम प्राधिकारी से तथा कक्षा 9 से 12 तक के उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त संस्थान ही अधिनियम के दायरे में होंगे। नदीम उद्दीन के अनुसार मकतब, जहां बच्चों को कुरान, व्याकरण और धार्मिक परंपराओं की शिक्षा दी जाती है, इस अधिनियम से बाहर हैं। उच्च न्यायालय भी मकतब को मदरसे से अलग मान चुका है।
परिषद की ओर से उपलब्ध सूचना के अनुसार मदरसा बोर्ड ने वर्ष 2013 से 2025 के बीच मुंशी, मौलवी और आलिम (अरबी-फारसी) की पांच परीक्षाएं आयोजित कीं। वर्ष 2013 से 2024 तक कमिल और फाजिल की परीक्षाएं भी कराई गईं, हालांकि परीक्षार्थियों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही।