एक सितंबर 1994 में अलग उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर यहां पुलिस की गोलियों का शिकार हुए राज्य आंदोलनकारी को मंगलवार को याद कर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।
21 साल पहले आज ही के दिन पृथक राज्य की मांग पर जुलूस निकाल रहे सैकड़ों लोगों पर पुलिस ने फायरिंग कर दी थी जिसमें सात लोगों की मौत हो गई थी जबकि सैकड़ों अन्य घायल हो गए थे।
गोलीकांड की 21वीं बरसी पर यहां संजय रेलवे पार्क स्थित शहीद स्मारक पर बड़ी संख्या में लोगों ने शहीद परमजीत सिंह, धर्मानंद भट्ट, प्रताप सिंह मनोला, सलीम, गोपी चंद, रामपाल और भगवान सिंह सिरौला को श्रद्धासुमन अर्पित शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाने का संकल्प लिया।
शहीदों को श्रद्धांजलि देने आए राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि उत्तराखंड पहला राज्य है, जहां आंदोलनकारियों को नौकरी, पेंशन दी गई और इस विधानसभा सत्र में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का विधेयक पास हो जाएगा।
उक्रांद के पूर्व अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के शहीद दिवस को लेकर सरकार की ओर से उदासीनता बरती जा रही है। मंत्रिगण ऐसे कार्यक्रमों में नहीं पहुंच रही है।
सरकार राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण में भी अभी तक सही नीति नहीं अपना पाई। अक्सर सुनने को मिलता है कि चिन्हीकरण में गड़बड़ियां हुई हैं।
उन्होंने कहा कि हमने राज्य पेंशन या नौकरी में आरक्षण के लिए नहीं बनाया था, लेकिन अगर सरकार ने उसे दिया है तो वह जितना ज्यादा से ज्यादा हो सकता है वह दे।
पूर्व विधायक गोपाल सिंह राणा ने कहा कि आज हम विधायक बने तो शहीदों की शहादत की वजह से बने हैं, लेकिन शहीद स्मारक नहीं बन पाया इसके लिए सभी दल जिम्मेदार हैं।
विधायक पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार जो भी विधेयक आरक्षण को लेकर आएगी, हम उसे पास कराएंगे। उन्होंने पांच लाख रुपए की घोषणा भी शहीद स्मारक के लिए की।
विधायक डा. प्रेम सिंह राणा ने आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की कार्यवाही शीघ्र पूर्ण करने को कहा। कार्यक्रम अध्यक्ष शेर सिंह दिगारी ने शहीद दिवस को सरकारी कार्यक्रम घोषित करने की मांग की।
अन्य वक्ताओं में ब्लाक प्रमुख दान सिंह राणा, महेश जोशी, प्रकाश तिवारी, देवेंद्र चंद, गोपी चढ्ढा, कुंवर सिंह खनका आदि थे।
इस दौरान एसडीएम ऋचा सिंह, तहसीलदार डीआर आर्य, पालिकाध्यक्ष सुरय्या मेंहदी, संतोष गौरव, मेंहदी हसन, राजू जुनेजा, किशोरी देवी, शिव शंकर भाटिया, राजू सोनकर, दीवान सिंह सैल्ला, पुष्कर दत्त भट्ट, मान सिंह सामंत, ठा. भगवान सिंह, सतीश गोयल, देवेंद्र कन्याल, हरीश बोरा, हरीश जोशी, उम्मेद सिंह रौतेला, गणेश ठकुराठी, रंदीप पोखरिया, किशोर जोशी, किशन बिष्ट, तुलसी भट्ट, कौशल्या बाफिला, विमला मुंडेला, नीरज रस्तोगी, रियासत अली आदि थे। संचालन अमित कुमार पांडे ने किया।