काशीपुर। क्षेत्र के किसानों के बीच सबसे लोकप्रिय गन्ने की प्रजाति 0238 पर वर्तमान में अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है। अपनी अधिक पैदावार के कारण किसानों की पहली पसंद बनी यह प्रजाति अब खतरनाक लाल सड़न रोग की चपेट में है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते किसान नहीं जागे, तो पूरी फसल चौपट हो सकती है।
गन्ना अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार, लाल सड़न एक लाइलाज बीमारी की तरह है। इसके प्रसार को देखते हुए विशेषज्ञ अब गांव-गांव जाकर संगोष्ठियां कर रहे हैं और किसानों को 0238 के बजाय नई उन्नतशील प्रजातियां जैसे 15023, 13235, 14201 और 12226 लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
वैज्ञानिकों की ये है सलाह
-कम प्रभावित खेतों से रोगी पौधों को उखाड़कर जला दें या जमीन में दवा डालें।
-अधिक प्रभावित खेतों में गन्ने की आपूर्ति के बाद कम से कम एक वर्ष तक गन्ने की बुवाई न करें।
गन्ने के स्थान पर पहले गेहूं या धान की फसल उगाएं, जिससे मिट्टी में मौजूद रोग के कीटाणु समाप्त हो सकें।
कम हुई बारिश का असर दिखने लगा
वैज्ञानिकों के अनुसार, कम बारिश के कारण गन्ने की फसल पर गंभीर असर पड़ रहा है, जिससे उत्पादन में 10-15 फीसदी तक की कमी हुई है। नमी की कमी से फसल की वृद्धि रुक गई है। गन्ने का वजन और लंबाई कम हो रही है। कम बारिश से गन्ने की फसल सूखी और रेशेदार हो जाती है। वजन और उत्पादकता घट जाता है।
कोट -
गन्ने की प्रजाति 0238 में रेड सड़क बीमारी से ग्रसित हो गई है। गन्ने का रकबा लगातार घट रहा है। बारिश की कमी और गन्ने की प्रजाति 0238 में हुई बीमारी से इस बार पैदावार में कमी आने की संभावना है।
चंद्र सिंह इमलाल, अपर आयुक्त गन्ना विभाग