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बारिश का पड़ा खलल, लेकिन जोश नहीं हुआ ठंडा

Fri, 15 Feb 2019 12:28 AM IST
अरुण कुमार चंदन बंगारी
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सभा के दौरान हुई बारिश से बचने के लिए कुर्सी का सहारा लेते लोग। - फोटो : amar ujala
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मौसम के बदले मिजाज ने भाजपा की महारैली में खलल डाल दिया। रुक-रुककर हुई बारिश ने कार्यकर्ताओं को जरूर परेशान किया, लेकिन उनका उत्साह ठंडा नहीं पड़ा। पीएम मोदी को सुनने और देखने के लिए कार्यकर्ता आखिरी पलों तक रैलीस्थल में जमे रहे। हालांकि मोदी के नहीं आने पर उनमें जरूर निराशा हुई। दिनभर बदलते रहे मौसम के मिजाज से भाजपा नेताओं के चेहरे कभी खिले तो कभी मायूस दिखे।  

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दरअसल बृहस्पतिवार सुबह से ही बादलों के साथ ही हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई थी। इसके चलते भाजपा नेताओं के माथे पर बल पड़ गए। लेकिन फिर मौसम ठीक हुआ तो रैली स्थल पर पीएम को सुनने के लिए लोगों की लंबी कतारें लग गईं। उत्साह का आलम यह था कि सुरक्षा गेट से अंदर घुसते ही कार्यकर्ताओं में कुर्सी पर बैठने को लेकर होड़ मची रही। काफी संख्या में कार्यकर्ता कुर्सी में बैठे ही थे कि अचानक फिर मेघ बरसने शुरू हो गए। 

बारिश से बचने के लिए लोग पंडाल से बाहर की ओर भागने लगे। काफी संख्या में लोग मैदान के पास स्थित एफसीआई की भवनों की ओट में रहे। हर कोई बारिश से बचने की जुगत खोजता रहा। लोगों के साथ ही ड्यूटी पर तैनात कई पुलिसकर्मी भी बारिश में भीग गए। 
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इनके अलावा कुछ लोग तो बारिश से बचने के लिए पानी के टैंकरों के नीचे दुबके रहे। इसी बीच बारिश थमी तो फिर से लोगों ने सभास्थल की ओर रुख किया। मौसम सामान्य होने के बाद नेताओं ने संबोधन शुरू किया। इसी बीच फिर से बारिश हुई तो कई लोगों ने बचने के लिए कुर्सियां उठाकर सिर पर रख लीं। लेकिन कार्यकर्ताओं का जोश ठंडा नहीं हुआ। 

रैली स्थल में चारों ओर मोदी-मोदी के नारे गूंज रहे थे। कुछ देर बाद बारिश बंद हो गई। शाम को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने संबोधन करना शुरू किया और बताया कि पीएम रास्ते में हैं। इसी बीच फिर से बूंदाबांदी शुरू हो गई। लेकिन कार्यकर्ता मोदी को सुनने की लालसा में डटे रहे। अंत में हजारों कार्यकर्ताओं को भले ही निराशा हाथ लगी, मगर उनका जोश पर बारिश का असर नहीं पड़ा। लोगों के जोश देखकर मंचासीन नेताओं के चेहरे भी खिले रहे।

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