रुद्रपुर। जिले में सैकड़ों निजी अस्पताल और पैैथौलॉजी लैब बगैर पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग को राजस्व नुकसान होने के साथ ही स्वास्थ्य संस्थाओं के पंजीकरण के बनाए क्लीनिकल एस्टब्लिशमेंट एक्ट का खुला उल्लंघन हो रहा है। अस्पताल संचालकों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए अब ब्लॉक स्तर के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कार्रवाई करेंगे।
जिले में वर्तमान में कुल 657 अस्पताल, क्लीनिक व पैथोलॉजी लैब ही पंजीकृत हैं। इनमें 165 स्थायी रूप से पंजीकृत और 492 अस्थायी रूप से पंजीकृत हैं। लेकिन जिले में पंजीकृत अस्पतालों, क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब की संख्या हजारों में हैं। दरअसल क्लीनिकल एस्टब्लिशमेंट एक्ट का अनुपालन न होने के कारण स्वास्थ्य विभाग को जिले में निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब का सही आंकड़ा पता नहीं चल पा रहा है।
जानकारों का कहना है कि जिले में निजी अस्पतालों, क्लीनिक और पैथॉलॉजी लैबौं की संख्या दो हजार से अधिक है, लेकिन पंजीकरण की फीस से बचने के लिए निजी अस्पताल संचालक बगैर पंजीकरण अस्पतालों का संचालन कर रहे हैं। इस संबंध में एसीएमओ डॉ. हरेंद्र मलिक बताते हैं कि बगैर पंजीकरण संचालित हो रहे अस्पतालों के विरुद्ध अब ब्लॉक के एमओआईसी की टीम भी कार्रवाई करेगी। दरअसल अपने ब्लॉक में बगैर पंजीकरण चल रहे अस्पतालों की सटीक सूचना एमओआईसी व उनकी टीम के पास होती है। इससे निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब के पंजीकरण में तेजी आएगी।
शहरी क्षेत्र में अस्पतालों के स्थायी का पंजीकरण शुल्क
बेड की संख्या सामान्य सुपर स्पेशलिटी
01-10 बेड 18000 रुपये 25000 रुपये
11-20 बेड 20000 रुपये 30000 रुपये
21-30 बेड 40000 रुपये - 50000 रुपये
31-40 बेड60000 रुपये-80000 रुपये
41-50 बेड80000 रुपये 120000 रुपये
51-100 बेड100000 रुपये-150000 रुपये
101-500 बेड120000 रुपये -180000 रुपये
500 से अधिक बेड 180000 रुपये220000 रुपये