रुद्रपुर। श्रमिक संयुक्त मोर्चा ने देशी-विदेशी बड़े पूंजीपतियों के इशारे पर मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं को लागू करने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन करने के साथ ही श्रम संहिताओं की प्रतियां जलाई। श्रमिकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।
बुधवार को श्रम कार्यालय परिसर में हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि चार श्रम संहिताओं को लागू करके केंद्र सरकार ने मजदूरों के स्थायी नौकरी पाने, संगठित होने और हड़ताल करने के अधिकारों पर चोट की है। स्थायी काम पर ठेका, प्रशिक्षण और फिक्स टर्म के रूप में अस्थायी और अधिकार विहीन मजदूरों को नियोजित करने के लिए कंपनी मालिकों को असीमित कानूनी छूट और अधिकार दे दिए हैं। आठ घंटे के कार्यदिवस के अधिकार को छीन लिया है। पेंशन, पीएफ, ग्रेच्युटी, ईएसआई, ग्रेच्युटी के अधिकार पर भी हमले किए गए हैं। उन्होंने कहा कि श्रम विभाग और श्रम न्यायालयों को कमजोर और पंगु बनाने की साजिश रची गईं है। सभा को श्रमिक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश तिवारी, इंकलाबी मजदूर केंद्र के कैलाश भट्ट, सुरेंद्र, धीरज, भाकपा (माले) के ललित मटियाली, अनिता अन्ना, सुब्रत विश्वास, सुनीता, हीरा सिंह राठौर उत्तम दास, जगमोहन डसीला आदि मौजूद थे ।