गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी श्री नानकमत्ता साहिब के महासचिव, सचिव और अन्य पर दर्ज मुकदमे वापस न होने पर तराई सिख महासभा के लोगों का आक्रोश बढ़ रहा है। जिले के अलावा सीमावर्ती यूपी से पहुंचे सिख समुदाय के सैकड़ों लोगों ने पहले पुलिस कार्यालय में प्रदर्शन कर नारेबाजी की। इसके बाद कलक्ट्रेट के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए। भारी संख्या में भीड़ को देखकर पुलिस कर्मियों व प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। एसएसपी और एडीएम के कार्यवाही के आश्वासन पर लोग लौटे।
बृहस्पतिवार को रुद्रपुर, जसपुर, काशीपुर, किच्छा, सितारगंज, गदरपुर, बाजपुर, काशीपुर, बिलासपुर, बहेड़ी और अफजलगढ़ से तराई सिख महासभा के सैकड़ों लोग अपने वाहनों से पुलिस कार्यालय के बाहर पहुंचे। उन्होंने हाथों में पोस्टर लेकर पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि वर्ष 1998 से गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता की भूमि और गुरुद्वारों पर किए कब्जों के विरुद्ध वर्ष 2008 में सिख समाज ने तराई सिख महासभा संगठन बनाकर आंदोलन किया था। उच्च न्यायालय में कमेटी का पक्ष रखा गया था।
न्यायालय के आदेश पर आठ सितंबर 2016 से 21 दिसंबर 2016 को कमेटी का चुनाव संपन्न हुआ था। नवगठित कमेटी में तराई सिख महासभा के पदाधिकारी प्रीतम सिंह संधू महासचिव और केहर सिंह सचिव चुने गए थे। साजिश के तहत महासचिव, सचिव और अन्य साथियों पर झूठे मुकदमे दर्ज करा दिए गए। उन्होंने मामले की जांच कर दर्ज हुए मुकदमे वापस लेने और नानकमत्ता एसओ कमलेश भट्ट को निलंबित करने की मांग की है। चेतावनी दी कि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
इस संबंध में उन्होंने एसएसपी डीएस कुंवर और एडीएम जेसी कांडपाल से भी वार्ता की। वहां पर मुख्तयार सिंह, सुखदेव सिंह, नरेंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह संधू, नगेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह विर्क, अमरजीत सिंह, सुखदेव सिंह, लखविंदर सिंह, वजिंदर सिंह, लखविंदर सिंह आदि थे।