सितारगंज। क्षेत्र की बरसों पुरानी रेलवे निर्माण की मांग अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। इसको लेकर विभिन्न संगठनों ने शनिवार को एसडीएम दफ्तर पर नारेबाजी कर धरना दिया। पूर्व सांसद महेंद्र पाल ने कहा कि रेलवे प्रशासन के नए एलाइनमेंट पर सर्वेक्षण करने के बाद भी राज्य सरकार चयनित क्षेत्र की भूमि अधिग्रहण का कार्य नहीं कराया। इससे जनता में आक्रोश है।
शनिवार को कांग्रेस, रेल जन संघर्ष समिति व किसानों ने एसडीएम दफ्तर पर धरना दिया। यहां आयोजित सभा में कांग्रेस के पूर्व सांसद महेंद्र पाल ने कहा कि वर्ष 2003 में किच्छा-खटीमा रेल परियोजना के रूप में स्वीकृत हुई थी। रेल विभाग ने सर्वेक्षण भी कराया लेकिन राज्य सरकार से भूमि अधिग्रहीत न करने से इस परियोजना पर कार्य नहीं हो सका। अब लालकुआं, शक्तिफार्म, जेलकैंप, सिडकुल सितारगंज, नानकमत्ता व खटीमा तक नए एलाइनमेंट पर सर्वेक्षण किया गया है। इसके लिए रेलवे ने राज्य सरकार को भूमि के लिए अवगत कराया। इस परियोजना की कुल लागत 1389.76 करोड़ आंकी गई है। इसमें से भूमि अधिग्रहण में करीब 526.69 करोड़ रुपये लगेंगे। आरोप लगाया कि भूमि अधिग्रहण के लिए पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने यूएस नगर के डीएम, परिवहन सचिव को साल 2018 और 2019 में तीन पत्र भेजे लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने संयुक्त मजिस्ट्रेट गौरव कुमार के माध्यम से सीएम को पत्र भेजकर जल्द रेल परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य कराने की मांग की। वहां वरिष्ठ कांग्रेसी रामनगीना प्रसाद, नगराध्यक्ष हरपाल सिंह, किसान नेता प्रकाश तिवारी, ठा. महेंद्र सिंह, जगदीश राणा, सुरेंद्र सिंह, वसीम मियां, उम्मेद सिंह नेगी, अखिलेश बंटी, नित्यानंद जोशी, नरेंद्र बमराह, मुख्त्यार अंसारी, साहब सिंह बिज्टी, विपिन खोलिया, करमजीत सिंह आदि थे।
रेल सुविधा से तीर्थ स्थलों तक पहुंचने में होगी आसानी
सितारगंज। नई रेल परियोजना का निर्माण होने से टनकपुर मां पूर्णागिरी धाम, नानकमत्ता के प्रख्यात गुरुद्वारा साहिब तक श्रद्धालुओं को आनेजाने में बेहतर सुविधा होगी। सितारगंज में सिडकुल को भी बेहतर ट्रांसपोर्टेशन का लाभ मिलेगा। पिथौरागढ़ के सीमांत क्षेत्र भी सीधे देहरादून और दिल्ली के साथ जुड़ सकेंगे। इससे राज्य की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।