ढाई वर्षों से कागजों में ही घूम रहा मंडी परिषद का वाइनरी प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया है। बताया जा रहा है कि एफएल टू से मिले जिस लाभांश से वाइनरी स्थापित होनी थी, वह बजट कोल्ड स्टोर सहित अन्य कार्यों में खर्च हो चुका है। वहीं, पहाड़ में वाइनरी लगाने के लिए मंडी के पास जरूरत के मुताबिक जगह भी नहीं है। मामले में मंडी परिषद के एमडी आबकारी विभाग से मंजूरी के इंतजार की बात कह रहे हैं।
दरअसल पहाड़ों में फल उत्पादकों को मुुनाफा पहुंचाने के मकसद से मंडी परिषद ने वर्ष 2015 में वाइनरी लगाने की योजना तैयार की थी। भवाली के पास फरसौली में करीब 10 एकड़ जमीन पर करीब 20 करोड़ की लागत से वाइनरी स्थापित होनी थी। इसमें रेड, व्हाइट वाइन के अलावा सिरका, साइडर भी तैयार किया जाना था। ग्रामीणों के विरोध की वजह से तत्कालीन सीएम के निर्देश फरसौली के बजाए वाइनरी को रुद्रपुर में मंडी की जमीन पर लगाने की कवायद की गई थी। विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले मुख्यमंत्री ने वाइनरी का शिलान्यास भी कर दिया था।
वाइनरी निर्माण के लिए टेंडर से कार्यदायी संस्था भी चयनित हो चुकी थी, लेकिन चुनाव के बाद सत्ता बदली तो कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने तराई के बजाए वाइनरी को पहाड़ पर स्थापित करने के निर्देश दे दिए। उनका मानना था कि फल उत्पादक पहाड़ पर ज्यादा है, लिहाजा वाइनरी को पहाड़ पर स्थापित करना चाहिए। इधर, मंडी वाइनरी को फरसौली में लगाने की तैयारी कर रही थी कि एकाएक शासन ने मंडी को वहां की जमीन परिवहन निगम को रोडवेज बस अड्डा बनाने के लिए निशुल्क देने के आदेश दे दिए। इसके बाद से ही मंडी का प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में है। मंडी सूत्रों के मुताबिक जिस लाभांश से वाइनरी लगाई जानी थी, वह पैसा दूसरे विकास कार्यों में खर्च हो चुका है।
वाइनरी लगाने का प्रोजेक्ट लंबित है। मंडी के पास वाइनरी लगाने के लिए बजट और जमीन दोनों है। आबकारी विभाग से अनुमति का इंतजार किया जा रहा है। वहां से अनुमति मिलने के बाद वाइनरी स्थापित करने को लेकर कार्यवाही की जाएगी।
- धीराज गर्ब्याल, एमडी, मंडी परिषद्।