सितारगंज की संपूर्णानंद शिविर खुली जेल और केंद्रीय कारागार में विभिन्न अपराधों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों ने नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और राज्य मानवाधिकार आयोग को संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त पत्र के जरिये यूपी की तर्ज पर रिहाई की मांग की है।
कैदियों ने पत्र में जिक्र किया है कि 14 साल से अधिक कारावास भुगत चुके कैदियों के लिए उत्तराखंड सरकार की ओर से कोई स्थायी नीति नहीं होने से कैदियों में हताशा है। ऐसे में उनके भीतर जीने की इच्छा भी खत्म हो चुकी है।
मालूम हो कि हर वर्ष गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस पर 14 साल से अधिक जेल में सजा काट चुके आजीवन कैदियों को रिहा किया जाता है। कैदियों ने पत्र में कहा है कि कारागार विभाग को शासन की ओर से आजीवन कारावास भुगत रहे कैदियों को समय पूर्व मुक्त करने के संबंध में समय-समय पर समीक्षा करने और स्थायी नीति बनाने के निर्देश हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2018 में इस फैसले का संज्ञान लिया। इसके बाद यूपी सरकार की ओर से 1577 आजीवन कारावास वाले कैदियों को रिहा करने की कार्यवाही शुरू हो गई है। इधर, उत्तराखंड सरकार की ओर से इस संबंध में कोई स्थायी नीति नहीं बनी है।
ऐसे में कैदियों में निराशा और हताशा घर कर रही है। पत्र में कैदियों ने कहा कि उनके भीतर अब जीवन जीने की इच्छा खत्म हो चुकी है, ऐसे में उन्हें इच्छा मृत्यु दे दी जाए। मृत्यु के बाद पार्थिव शरीर चिकित्सीय अनुसंधान के लिए दान कर दिया जाए, ताकि उनके शरीर के अंग अन्य लोगों के काम आ सकें।
कोट
कुछ लोगों की ओर से षड्यंत्र के तहत कैदियों को भड़काया जा रहा है, जिसके बाद कैदियों की ओर से पत्र लिखा गया है। हर वर्ष पात्रता के आधार पर शासन के नियमों के तहत कैदियों को रिहा किया जाता है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बनाई गई स्थायी नीति 2018 का अवलोकन किया जाएगा। इसके बाद राज्य में स्थायी नीति बनाने पर उचित निर्णय लिया जाएगा।
- पीवेके प्रसाद, आईजी कारागार।