फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कैदी नंबर 350 और 445 फिर बने रोशन लाल और शेखर चंद्र 

Sun, 28 Jan 2018 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो  सितारगंज।
विज्ञापन
जेल से रिहा कैदी रोशन लाल। - फोटो : Amar ujala
विज्ञापन

संपूर्णानंद सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी नंबर 350 और कैदी नंबर 445 गणतंत्र दिवस पर एक बार फिर से रोशन लाल और शेखर चंद्र बन गए। 14 साल से सिर्फ नंबर की पहचान लिए जी रहे यह दो शख्स इतने अरसे में पहली बार खुश नजर आए। दोनों कैदी आर्मी से सेवानिवृत्त सैनिक हैं। इनमें एक कैदी ने अपने पड़ोसी की गोली मारकर तो दूसरे ने पत्नी की हत्या कर दी थी। दोनों कैदियों की आजादी से उनके परिवारों में खुशी की माहौल है। 

विज्ञापन


संपूर्णानंद शिविर खुली जेल और सेंट्रल जेल के 80 कैदियों की सजा माफी की फाइलों पर विचार के बाद गणतंत्र दिवस पर शासन से सिर्फ दो कैदियों को ही आजादी मिल सकी है। जेल प्रशासन के अनुसार सैल पातालदेवी जिला अल्मोड़ा निवासी रोशन लाल (67) पुत्र मोतीराम ने वर्ष 1982-83 में अपने पड़ोसी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद अल्मोड़ा कोर्ट से उसे उम्रकैद की सजा मिली। इसी तरह ग्राम रिची कोश्याकुटौली जिला नैनीताल निवासी शेखर चंद्र (57) पुत्र केशव दत्त ने वर्ष 1980-81 में पत्नी की हत्या कर दी थी। उसे भी अदालत से उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। दोनों ने 14 साल से अधिक की सजा काट ली थी।

इस लंबे अरसे में रोशन लाल की पहचान सिर्फ कैदी नंबर 350 और शेखर चंद्र की पहचान कैदी नंबर 445 ही बनकर रह गई थी। वक्त और हालात के थपेड़े ऐसे थे कि शायद यह दोनों भी अपना असली नाम भूल से गए थे। बीती 13 नवंबर को कारागार महानिरीक्षक डॉ. पीवीके प्रसाद ने सेंट्रल जेल का निरीक्षण कर 14 साल से अधिक सजा काटने वाले और 70 वर्ष से अधिक आयु वाले उम्र दराज कैदियों से वार्ता कर शासन में गठित रिव्यू कमेटी को उनकी सजा माफी की फाइलें सौंपी थीं। करीब 80 कैदी उक्त नियम के तहत यहां सजा काट रहे थे। इनमें से राज्यपाल डॉ. केके पाल ने संविधान में दिए गए अधिकारों का प्रयोग करते हुए रोशन लाल और शेखर चंद्र की सजा माफी को स्वीकार कर उनकी रिहाई के आदेश दिए, जबकि अन्य कैदियों की फाइलें शासन में अभी विचाराधीन हैं।
विज्ञापन


गणतंत्र दिवस पर जब दोनों कैदी जेल रिहा हुए तो खुशी से उनकी आंखें छलक आईं। रोशन लाल का कहना था कि सरकार ने उनको नई जिंदगी दी है अब इसे वह समाज हित में कार्य करने में लगाएंगे। शेखर चंद्र आजादी मिलने से खुश तो थे, लेकिन परिवार के किसी भी सदस्य के उनकी रिहाई पर जेल नहीं पहुंचने से वह मायूस नजर आए। शेखर का कहना था कि अपने बच्चों के साथ रहकर जिंदगी के अंतिम लम्हे बिताएंगे। 

पूर्व सैनिक थे रोशन लाल और शेखर चंद्र 
सितारगंज।
संपूर्णानंद सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा 14 साल तक लगातार काटने वाले रोशन लाल और शेखर चंद्र आर्मी के पूर्व सैनिक हैं। दोनों आर्मी में अपनी सेवा देने के बाद सैनिक पद से सेवानिवृत्त हो गए थे और फिर उनके साथ यह घटनाएं घटीं। रोशन की पत्नी टीचर थीं, जो पिछले वर्ष सेवानिवृत्त हो गई हैं। दो बेटे हैं, जिनमें बड़ा बेटा हल्द्वानी में एक बैंक में अधिकारी है। वहीं आर्मी से शेखर चंद्र के तीन बच्चे हैं। दोनों को आर्मी से 15-20 हजार रुपये पेंशन मिलती है। 

संपूर्णानंद सेंट्रल जेल के 17 कैदियों की रिहाई उम्मीद थी। शासन से अभी रोशन लाल और शेखर चंद्र का रिहा करने के आदेश मिले थे। शेष कैदियों की रिहाई पर विचार चल रहा है। आदेश मिलते ही अन्य कैदी भी रिहा किए जाएंगे। 
विज्ञापन

- टीडी जोशी, जेल अधीक्षक, संपूर्णानंद शिविर एवं सेंट्रल जेल, सितारगंज। 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें