लीवर की बीमारी के चलते दिल्ली के अस्पताल में उपचार कराने के दौरान फरार हुए विचाराधीन कैदी को रुद्रपुर पुलिस ने मुंबई से दबोच लिया है। कैदी के साथ मुल्जिम ड्यूटी में लगे रुद्रपुर पुलिस लाइन के सिपाही भी पुलिस को मुंबई में ही मिल गए हैं। अब पुलिस तीनों को रुद्रपुर लाने की तैयारी कर रही है। कोर्ट ने कैदी के मामले की सुनवाई के लिए अब आठ मार्च का समय दिया है।
बता दें कि मूल रुप से रानीखेत के रहने वाले कैदी प्रकाश चंद्र कांडपाल को लीवर की बीमारी के चलते बीते साल पांच दिसंबर को हल्द्वानी जेल से एसटीएच में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। इस दौरान उसकी निगरानी के लिए पुलिस लाइन के दो सिपाही ललित नेगी और अशोक को लगाया गया था। हालत गंभीर होने पर प्रकाश को 15 दिसंबर को ही दिल्ली के एम्स अस्पताल रेफर कर दिया गया। 27 फरवरी के दिन प्रकाश को गैंगस्टर के मामले की सुनवाई के लिए रुद्रपुर की सीजेएम कोर्ट में हाजिर होना था, लेकिन वह नहीं हुआ। इसके चलते कोर्ट ने हल्द्वानी जेल प्रशासन से प्रकाश के हाजिर न होने की जानकारी मांगी और जेल प्रशासन ने एसएसपी ऊधमसिंह नगर सेंथिल अबुदई से इस संबंध में पत्राचार किया। एसएसपी द्वारा जब इस बारे में जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि कैदी प्रकाश एम्स अस्पताल में नहीं है। इसी दौरान प्रकाश की निगरानी में लगे सिपाही ललित और अशोक का भी कोई अता पता नहीं मिला। शुक्रवार को जब सिपाहियों के मोबाइल नंबर को सर्विलांस में लगाया गया तो एक की लोकेशन दिल्ली में और दूसरे की लोकेशन मुंबई में मिली। इसके आधार पर पुलिस की दो टीमों ने एएसपी मंजूनाथ टीसी के नेतृत्व में दिल्ली और मुंबई में डेरा डाल दिया और शनिवार को कैदी प्रकाश के साथ ही सिपाही ललित और अशोक को मुंबई से बरामद कर लिया। अब पुलिस तीनों को रुद्रपुर लाने की तैयारी कर रही है। सीजेएम कोर्ट ने कैदी प्रकाश को सुनवाई के लिए अब आठ मार्च का समय दिया है। मामले को लेकर एसएसपी संथिल अबुदई का कहना है कि कैदी के फरार होने में प्रथम दृष्टया सिपाहियों की लापरवाही मानी जा रही है। फिलहाल कैदी प्रकाश के साथ ही सिपाहियों को मुंबई से बरामद कर लिया गया है। मामले की जांच सीओ ऑफिस स्वतंत्र कुमार को सौंपी गई है। जांच के बाद जो भी मामले में दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सात मुकदमों में एक में नहीं मिली है बेल
रुद्रपुर। एम्स अस्पताल में उपचार के दौरान फरार हुए कैदी प्रकाश चंद्र कांडपाल के ऊपर 3 एनआई एक्ट, 4 धोखाधड़ी और एक गैंगस्टर का मुकदमा था। जिसमें से एनआई एक्ट और धोखाधड़ी के मामलों में प्रकाश को पहले ही कोर्ट से बेल मिल गई थी, रुद्रपुर की सीजेएम कोर्ट में उसका गैंगस्टर का मुकदमा चल रहा था। इसकी 27 फरवरी को सुनवाई होनी थी। इसी दौरान उसके लीवर में खराबी आई और उसे एसटीएच के बाद दिल्ली एम्स में भर्ती कराना पड़ा। और यहीं से वह फरार हो गया।
क्या सिपाहियों की मदद से फरार हुआ था प्रकाश
रुद्रपुर। उपचार के दौरान फरार हुए विचाराधीन कैदी प्रकाश कांडपाल के मामले में अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वह सिपाहियों को चकमा देकर फरार हुआ था या फिर सिपाही इस पूरे खेल में शामिल हैं। एसटीएम के बाद जब प्रकाश को एम्स में रैफर किया गया तो इस दौरान रुद्रपुर पुलिस के साथ ही हल्द्वानी जेल प्रशासन भी लगातार सिपाहियों से कैदी के बारे में जानकारी लेते रहे और हर बार सिपाहियों ने प्रकाश के एम्स में होने की बात कही। और जब प्रकाश को रुद्रपुर सीजेएम कोर्ट में पेश करने का समय आया तो सिपाहियों ने उसकी हालत गंभीर होने की बात कहकर उसे लाने में असमर्थ बता दिया। जब मीडिया तक बात पहुंची तो दोनों सिपाहियों ने अपने अधिकारियों से संपर्क ही तोड़ लिया और अंत में दोनों सिपाही कैदी के साथ मुंबई में ही मिले।
तारीख नहीं होती तो नहीं खुलता राज
रुद्रपुर। बीमारी के दौरान फरार हुए कैदी प्रकाश कांडपाल की अगर रुद्रपुर के सीजेएम कोर्ट में सुनवाई की तारीख नहीं आती तो न ही उसके फरार होने के राज से पर्दा उठता और न ही सिपाहियों की करतूत उजागर होती। 16 जुलाई 2016 को प्रकाश को हल्द्वानी की जेल में लाया गया था जहां चार महीने बाद दिसंबर में ही उसकी तबियत खराब हो गई और उसे एसटीएच में भर्ती कर दिया गया। यहां से भी 10 दिन बाद उसे दिल्ली एम्स में रेफर कर दिया गया और उसके बाद करीब ढाई महीने बाद उसके लापता होने की खबर आई और इस दौरान भी वह जनवरी और फरवरी माह में क्या एम्स में था या नहीं यह भी अभी अनसुलझा है।