जिले में स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला में जल्द ही पॉलिग्राफ टेस्ट शुरू होगा। इसके साथ ही इमेज इनहेंसर भी खरीदा जाएगा। मंगलवार को आईजी और निदेशक फॉरेसिंक लैब अमित सिन्हा ने प्रयोगशाला के निरीक्षण के दौरान यह बात कही। मंगलवार को निदेशक और आईजी अमित सिन्हा ने किच्छा रोड स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला का निरीक्षण किया।
उन्होंने कहा कि विभाग ने पॉलिग्राफ और इमेज इनहेंसर की खरीद के लिए शासन को 50 लाख का प्रस्ताव बनाकर भेजा है। कहा कि एक जनवरी से लैब में नये बिसरा की जांच शुरू होगी और छह माह के भीतर डीएनए अनुभाग का भी शुभारंभ कर दिया जाएगा। बताया कि लैब में फिलहाल बिसरा, नारकोटिक्स और अन्य नमूनों की जांच की जा रही है। कहा कि कोई भी बिसरा जांच लैब में लंबित नहीं पड़ी है।
इसलिए एक जनवरी से नये बिसरों की जांच शुरू कर दी जाएगी। प्रयोगशाला को सुचारु रूप से चलाने के लिए जल्द ही यहां पर आठ वरिष्ठ वैज्ञानिक, 14 कनिष्ठ वैज्ञानिक, नौ प्रयोगशाला सहायक और दो कनिष्ठ लैब सहायकों की नियुक्ति की जाएगी। कैंपस की सड़क निर्माण के लिए भी दो लाख का बजट स्वीकृत हुआ है। इसके साथ ही कैंपस में जल्द ही गार्ड रूम, जेनरेटर रूम का भी निर्माण कराया जाएगा। वहां पर संयुक्त निदेशक डॉ. दयाल शरण और कोतवाल तुषार बोरा भी मौजूद रहे।
कुमाऊं के बाद गढ़वाल में भी बनेगी फील्ड यूनिट
आपराधिक मामलों में साक्ष्य संकलन के लिए संयुक्त निदेशक विधि विज्ञान प्रयोगशाला डॉ. दयाल शरण ने कुमाऊं के छह जनपदों में फील्ड यूनिट की स्थापना की है। एक यूनिट में एक एसआई, एक हेड कांस्टेबल, दो कांस्टेबल और एक वाहन चालक शामिल किये गये हैं। ये कर्मी आपराधिक मामलों में घटनास्थल पर जाकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाएंगे। आईजी अमित सिन्हा के अनुसार जल्द ही यूनिट को क्राइम किट बॉक्स उपलब्ध कराया जाएगा और गढ़वाल में भी फिल्ड यूनिट स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। इसका संचालन भी डॉ. दयाल शरण द्वारा किया जाएगा।
क्या है पॉलिग्राफ और इमेज इनहेंसर जांच
विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं में पॉलीग्राफ उपकरण ईसीजी की तर्ज पर काम करता है। इस उपकरण के इस्तेमाल से किसी भी व्यक्ति के रक्त दवाब, पसीने और हृदय गति से उसके सच या झूठ बोलने का पता लगाया जाता है अभी तक सीबीआई विधि विज्ञान प्रयोगशाला में ही इस उपकरण का प्रयोग किया जाता है। इसके साथ ही इमेज इनहेंसर मशीन से किसी भी घटना या व्यक्ति की खराब से खराब फोटो चित्रण को ठीक किया जाता है। इससे उसकी स्पष्ट पहचान हो जाती है। घटना के समय रात में ली गई फोटो और सीसीटीवी फुटेज में कैद हुए चित्र को इससे स्पष्ट देखा जा सकता है।