काशीपुर। भले ही विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने हैवीवेट प्रचारकों को बुलाकर जनता को लुभाने की पूरी कोशिश की हो। एक-दूसरे पार्टी पर जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगाए हों, लेकिन इस बार जनता ने राष्ट्रीय, राज्य स्तर के मुद्दों को भूलकर स्थानीय विकास के स्तर पर अपने मत का प्रयोग किया है। मतदाताओं पर नोटबंदी और पार्टियों के आरोप-प्रत्यारोप की झलक नहीं दिखाई दी।
कई दिनों की उठापटक और लगातार चले प्रचार ने इस बार मतदाताओं को तनिक भी प्रभावित नहीं किया। शायद सही कारण रहा है अधिकतर मतदाताओं ने कहा कि उन्हें अपने क्षेत्र का विकास चाहिए।
लोकलुभावन चुनावी नारों को दरकिनार कर मतदाताओं की पहली पसंद स्थानीय विकास रहा। खासतौर पर उन स्थानों पर भी इसकी झलक दिखाई दी जहां प्रत्याशी जातिवाद, क्षेत्रवाद को लेकर उन्हें वोट मिलने की आस थी।
मतदान के लिए लाइन में खड़े उत्साही युवा जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित दिखाई दिए। वहीं महिला, पुरुष समेत बुजुर्ग स्थानीय विकास को लेकर संजीदा दिखे। महिला मतदाताओं ने कहा कि उन्हें स्थानीय समस्याओं से निजात दिलाने वाला जनप्रतिनिधि चाहिए। जो क्षेत्र का विकास करेगा, उन्हें ही वोट दिया जाएगा।
कहा कि अब वोटर को अपनी वोट की अहमियत पता है, इसलिए कोई भी उन्हें झूठे प्रलोभन देकर प्रभावित नहीं कर सकता। वहीं युवाओं ने नोटबंदी को अच्छी पहल बताया। जबकि कई बुजुर्ग मतदाताओं ने कहा कि जातिवाद, क्षेत्रवाद का मुद्दा अब कोसों दूर चला गया है। अब जो विकास करेगा, वही जीतने का हकदार होगा।
काशीपुर। बुधवार को लोग धीरे-धीरे घर से निकले। सुबह आठ बजे से शुरू हुआ मतदान नौ बजे तक 13 प्रतिशत पहुंचा। इसके बाद लोग घरों से निकलने लगे और 11 बजे तक 23 प्रतिशत मतदान पहुंच गया। 11 से एक बजे तक 38 प्रतिशत मतदान हुआ जबकि एक से तीन बजे के बीच मतदान 50 प्रतिशत पहुंच गया। शाम पांच बजे तक 68.5 प्रतिशत मतदान हुआ।